भूमिका: एक जिले से उठी, पूरे सिस्टम को हिला देने वाली कहानी
1500 crore scam Surendranagar: गुजरात का सुरेंद्रनगर जिला, जो अब तक औद्योगिक विकास, कृषि और हाल के वर्षों में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था, आज एक ऐसे घोटाले के कारण देशभर की सुर्खियों में है, जिसने प्रशासनिक ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। “1500 crore scam Surendranagar” नाम से चर्चित यह मामला सिर्फ रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित, योजनाबद्ध और वर्षों से चल रहे जमीन-आधारित भ्रष्टाचार का उदाहरण बन चुका है।
इस घोटाले में जमीन को गैर-कृषि (NA – Non Agricultural) घोषित कराने, CLU (Change of Land Use) की मंजूरी दिलाने और बड़े भूमि अधिग्रहण सौदों को “तेज़ी से पास कराने” के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इसमें सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी नहीं, बल्कि जिले का शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी — तत्कालीन कलेक्टर — भी शामिल था।
1500 crore scam Surendranagar क्या है? – एक सरल समझ
इस घोटाले को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि जमीन NA या CLU क्यों अहम होती है।
- कृषि भूमि को Non-Agricultural (NA) घोषित किए बिना उस पर उद्योग, सोलर प्लांट, फैक्ट्री, हाउसिंग प्रोजेक्ट या कमर्शियल गतिविधि नहीं हो सकती।
- CLU यानी Change of Land Use प्रशासन की अनुमति से ही मिलता है।
- जैसे ही जमीन NA होती है, उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
इसी प्रक्रिया को कमाई का जरिया बनाकर सुरेंद्रनगर जिले में अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों का एक पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया।
ED को कैसे लगी भनक: जांच की शुरुआत
प्रवर्तन निदेशालय (ED) को विश्वसनीय खुफिया स्रोतों से जानकारी मिली थी कि सुरेंद्रनगर जिले में:
- बड़े पैमाने पर जमीन के NA और CLU आवेदन पास किए जा रहे हैं
- आवेदन “स्पीड मनी” के बिना आगे नहीं बढ़ते
- रिश्वत की दर स्क्वायर मीटर के हिसाब से तय होती है
- पैसा सीधे नहीं, बल्कि दलालों और एजेंटों के जरिए अधिकारियों तक पहुँचता है
इन्हीं सूचनाओं के आधार पर ED ने दिसंबर 2025 में गुप्त जांच शुरू की, जो आगे चलकर 1500 crore scam Surendranagar के रूप में सामने आई।
23 दिसंबर 2025: वह दिन जब पूरा सिस्टम हिल गया
23 दिसंबर 2025 को ED की कई स्पेशल टीमों ने:
- सुरेंद्रनगर
- गांधीनगर
- दिल्ली
में एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए की गई थी।
किन-किन जगहों पर रेड पड़ी
- तत्कालीन कलेक्टर का सरकारी बंगला
- नायब मामलतदार का निजी आवास
- क्लर्क और PA के घर
- संबंधित एजेंटों और संदिग्धों के ठिकाने
इस एक दिन की कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया।
ACB की एंट्री: रिश्वत विरोधी कानून के तहत FIR
ED की कार्रवाई के तुरंत बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), सुरेंद्रनगर ने मामला दर्ज किया। FIR में जिन नामों को आरोपी बनाया गया, वे हैं:
- राजेंद्र महेंद्र पटेल – तत्कालीन जिला कलेक्टर
- चंद्रसिंह मोरी – नायब मामलतदार
- मयूर गोहिल – कलेक्टर कार्यालय का क्लर्क
- जयराजसिंह झाला – कलेक्टर का निजी सहायक (PA)
इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराएं लगाई गईं।
पूर्व कलेक्टर की गिरफ्तारी: गांधीनगर से ED की बड़ी कार्रवाई
ED की तीन अलग-अलग टीमों ने गांधीनगर स्थित तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र पटेल के आवास पर घंटों पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिन्होंने जांच एजेंसी के शक को पुख्ता कर दिया।
गिरफ्तारी क्यों अहम थी?
- किसी जिले के कलेक्टर की गिरफ्तारी दुर्लभ होती है
- यह साबित करता है कि जांच सिर्फ “छोटे कर्मचारियों” तक सीमित नहीं
- इससे यह संदेश गया कि कानून से ऊपर कोई नहीं
इसके बाद राजेंद्र पटेल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
नायब मामलतदार चंद्रसिंह मोरी: घोटाले की “चाबी”
पूरे 1500 crore scam Surendranagar में अगर किसी एक व्यक्ति की भूमिका सबसे अहम रही, तो वह नायब मामलतदार चंद्रसिंह मोरी हैं।
67.50 लाख नकद की बरामदगी
ED की दिल्ली स्पेशल टीम ने उनके आवास पर PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी ली। इस दौरान:
- उनके बेडरूम से
- अलमारी और छुपे हुए स्थानों से
- 67.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए
यह रकम तुरंत जब्त कर ली गई।
खुद कबूला जुर्म
ED के सामने दिए गए बयान में चंद्रसिंह मोरी ने स्वीकार किया कि:
- यह पैसा जमीन NA और CLU मामलों में ली गई रिश्वत है
- आवेदकों से सीधे या बिचौलियों के जरिए पैसा लिया गया
- फाइल जल्दी और “फेवर में” निपटाने के बदले यह रकम वसूली गई
1 करोड़ की रिश्वत और बंटवारे का पूरा सिस्टम
जांच में यह भी सामने आया कि:
- कुल 1 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत ली गई
- पैसा सिर्फ मोरी तक सीमित नहीं था
- इसमें कलेक्टर, क्लर्क और PA की हिस्सेदारी थी
स्क्वायर मीटर के हिसाब से रिश्वत
- प्रति स्क्वायर मीटर 10 रुपये की दर
- जमीन जितनी बड़ी, रिश्वत उतनी ज्यादा
- बड़े सोलर और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में करोड़ों की डील
प्रिंटेड शीट: जिसने पूरा खेल खोल दिया
ED को तलाशी के दौरान एक प्रिंटेड शीट मिली, जिसने इस पूरे घोटाले की परतें खोल दीं।
शीट में क्या-क्या था
- ऑनलाइन आवेदन नंबर
- सर्वे नंबर
- जमीन का प्रकार
- NA / CLU आवेदन का विवरण
- किससे कितनी रिश्वत ली गई
बड़े आंकड़े
- 2,61,332 स्क्वायर मीटर जमीन
- 26.17 लाख रुपये रिश्वत सिर्फ इसी हिस्से में
हाथ से लिखा बंटवारा: कौन कितना लेता था
शीट के नीचे पेन से लिखा गया था:
- MD – 64 लाख
- CB – 60 हजार
- अशोक – 2.83 लाख
- HP – 6 लाख
- राकेशभाई – 5 हजार
- आशिषभाई – 70 हजार
यह साफ दिखाता है कि यह एक संगठित नेटवर्क था, न कि इक्का-दुक्का लेन-देन।
NA घोटाले का modus operandi: अंदर की पूरी प्रक्रिया
ED की जांच से जो तरीका सामने आया, वह इस प्रकार था:
- जमीन मालिक या डेवलपर आवेदन करता
- फाइल जानबूझकर रोकी जाती
- दलाल संपर्क करता
- स्क्वायर मीटर के हिसाब से रकम तय होती
- पैसा बिचौलियों के जरिए पहुँचता
- फाइल तुरंत पास हो जाती
यह पूरा सिस्टम वर्षों से चल रहा था।
सोलर प्लांट और जमीन अधिग्रहण: 1500 करोड़ का एंगल
इस घोटाले का सबसे बड़ा हिस्सा सोलर प्लांट से जुड़े जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है।
जांच के दायरे में आए इलाके
- नल सरोवर
- ध्रांगध्रा
- लिखतर
- पाटड़ी
- मालवाण
इन इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई और NA की गई।
24 दिसंबर 2025: 17 घंटे चली पूछताछ
ED ने सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक:
- कलेक्टर
- नायब मामलतदार
- PA
- क्लर्क
- एक हाईकोर्ट वकील
से लगातार पूछताछ की। यह पूछताछ 1500 crore scam Surendranagar की सबसे लंबी कार्रवाई मानी जाती है।
कलेक्टर के बंगले से 100 से ज्यादा फाइलें जब्त
ED ने कलेक्टर के सरकारी बंगले से:
- 100+ जमीन फाइलें
- CLU और NA से जुड़े दस्तावेज
- निजी नोट्स और रिकॉर्ड
जब्त किए। माना जा रहा है कि इन फाइलों से और बड़े खुलासे होंगे।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
इस घोटाले के बाद:
- विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला
- प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठे
- जमीन नीति की समीक्षा की मांग उठी
- ED और ACB को खुली छूट देने की बात कही गई
आम जनता पर असर
- छोटे किसानों को सालों इंतजार करना पड़ा
- बड़े प्रोजेक्ट्स पैसे देकर आगे बढ़े
- सिस्टम पर भरोसा कमजोर हुआ
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- और गिरफ्तारियां संभव हैं
- मनी ट्रेल की जांच जारी है
- बेनामी संपत्तियां जब्त हो सकती हैं
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निष्कर्ष: 1500 crore scam Surendranagar से मिलने वाला सबक
1500 crore scam Surendranagar सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर जमीन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पारदर्शिता नहीं होगी, तो पूरा सिस्टम खोखला हो जाएगा।
ED की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि चाहे पद कितना ही बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं।










