नागरिकों से सम्मानजनक व्यवहार की अपील हवा में उड़ती दिखी: अहमदाबाद और सूरत में पुलिस की कथित बर्बरता ने खड़े किए गंभीर सवाल-Ahmedabad News

🗓️ Published on: December 20, 2025 2:50 pm
Ahmedabad News

Ahmedabad News | Gujarat Police Conduct Under Scrutiny

Ahmedabad News: गुजरात में पुलिस व्यवस्था और नागरिकों के बीच विश्वास को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के गृह मंत्री हर्ष सांघवी द्वारा पुलिस को नागरिकों के साथ संवेदनशील और मर्यादित व्यवहार करने की दी गई सलाह को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि अहमदाबाद और सूरत से पुलिस की कथित बदसलूकी के दो अलग-अलग मामले सामने आ गए। इन घटनाओं ने न केवल कानून-व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि जमीनी हकीकत और मंचों से दिए गए संदेशों के बीच कितना बड़ा अंतर है।

यह Ahmedabad News रिपोर्ट उन घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है, जिनमें एक महिला के साथ ट्रैफिक पुलिस द्वारा कथित मारपीट और सूरत में एक व्यापारी को थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है।

अहमदाबाद में महिला से मारपीट का आरोप, आंख से निकला खून

अहमदाबाद के वासना इलाके की रहने वाली बंसरी ठक्कर नामक महिला ने ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार, 19 दिसंबर की शाम करीब 6:30 बजे वह एक चौराहे पर सिग्नल पार कर रही थीं, तभी एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने उन्हें रोका और ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने को कहा।

बंसरी ठक्कर का कहना है कि उन्होंने बिना किसी विरोध के अपना लाइसेंस दिखा दिया। इसके बाद उन्होंने ट्रैफिक बाधित न हो, इस उद्देश्य से अधिकारी से साइड में खड़े होने का अनुरोध किया। यहीं से स्थिति बिगड़ गई।

“पुलिस होकर ऐसे बात क्यों कर रहे हो?”

महिला का आरोप है कि साइड में हटने की बात पर ट्रैफिक पुलिस अधिकारी भड़क गया और ऊंची आवाज में बात करने लगा। जब बंसरी ने यह सवाल किया कि एक पुलिस अधिकारी होकर वह इस तरह से क्यों बात कर रहे हैं, तो अधिकारी और अधिक आक्रोशित हो गया ।

ID कार्ड गिरते ही भड़का पुलिस अधिकारी

पीड़िता के अनुसार, जब पुलिस अधिकारी ने दोबारा ID दिखाने को कहा, तो उन्होंने कार्ड वापस कर दिया। कार्ड लौटाते समय वह नीचे गिर गया। इसी बात पर पुलिस अधिकारी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

आरोप है कि अधिकारी ने बंसरी का हाथ जोर से खींचा, उनकी गाड़ी पर लात मारी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कार्ड उठाकर देने के लिए कहा।

थप्पड़ों से घायल हुई महिला, आंख के पास से बहा खून

घटना यहीं नहीं रुकी। महिला का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने उनके साथ लगातार थप्पड़ मारना शुरू कर दिया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि बंसरी की आंख के पास से खून बहने लगा। उनके कान और गालों पर भी चोट के निशान आ गए।

डरी-सहमी महिला ने तुरंत 112 पर कॉल किया और मदद मांगी। इसके बाद वह शिकायत दर्ज कराने पालडी पुलिस स्टेशन पहुंचीं।

पुलिस स्टेशन में भी नहीं मिली सुनवाई

पीड़िता का कहना है कि पालडी पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला। आरोप है कि वहां मौजूद PSI ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और उन्हें धमकाया। इसके बाद जब उन्होंने महिला PI से संपर्क किया, तो वहां भी उन्हें यह कहकर बाहर भेज दिया गया कि उनके खिलाफ “क्रॉस कंप्लेंट” दर्ज की जाएगी।

कई घंटों तक पुलिस स्टेशन में बैठे रहने के बाद, आखिरकार बंसरी ठक्कर ने रात 11:50 बजे एक लिखित आवेदन दिया।

यह पूरा मामला Ahmedabad News में पुलिस की जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

PI का पक्ष: “मामला ट्रैफिक का था”

पालडी पुलिस स्टेशन के PI एम.एन. परेवड़ा ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि चूंकि यह मामला ट्रैफिक से जुड़ा हुआ था, इसलिए महिला को ट्रैफिक पुलिस स्टेशन में शिकायत करने को कहा गया।

उनके अनुसार, घटनास्थल पर दोनों पक्षों के बीच दो बार बहस हुई थी, इसलिए क्रॉस कंप्लेंट की संभावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।

हालांकि, यह सफाई पीड़िता और नागरिक अधिकार संगठनों को संतुष्ट करती नहीं दिख रही।

सूरत में व्यापारी को थप्पड़, CCTV में कैद पूरी घटना

अहमदाबाद के साथ-साथ सूरत से भी पुलिस की कथित बदसलूकी का एक और मामला सामने आया है। यह घटना गृह मंत्री हर्ष सांघवी के गृह नगर सूरत की बताई जा रही है।

उमरा पुलिस स्टेशन के एक कांस्टेबल द्वारा की गई यह पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि देर रात दुकान खुली रखने पर कांस्टेबल बिना किसी चेतावनी या कानूनी प्रक्रिया के सीधे दुकानदार को थप्पड़ मार देता है।

कानून लागू करने की बजाय हिंसा?

वीडियो फुटेज में यह भी दिखता है कि कांस्टेबल सिर्फ व्यापारी को ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति को भी धक्का देता है और मारपीट करता है।

हालांकि यह स्वीकार किया गया है कि व्यापारी ने नियमों का उल्लंघन किया था और दुकान देर रात तक खुली रखी थी, लेकिन सवाल यह है कि क्या पुलिस को कानून लागू करने का अधिकार है या सजा देने का?

इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला है। डर के माहौल के चलते पीड़ित व्यापारी अब तक आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।

हर्ष सांघवी की सलाह और जमीनी हकीकत

18 दिसंबर 2025 को अहमदाबाद में खाखी भवन के उद्घाटन के दौरान गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने अहमदाबाद पुलिस को स्पष्ट संदेश दिया था कि पुलिसिंग ऐसी होनी चाहिए जिससे अपराधियों के “पैर कांप जाएं”।

उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिस को जनता के साथ मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए, ताकि आम लोग थाने आने से न डरें।

लेकिन इसके ठीक अगले दिन सामने आई ये घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन होता नहीं दिख रहा।

बुजुर्गों और आम नागरिकों के लिए पुलिस का व्यवहार क्यों अहम है?

कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि पुलिस का व्यवहार केवल अपराधियों के लिए सख्त होना चाहिए, न कि आम नागरिकों के लिए। अगर कोई बुजुर्ग व्यक्ति या महिला शिकायत लेकर थाने आती है, तो उनसे सम्मान और सहानुभूति के साथ पेश आना पुलिस की जिम्मेदारी है।

यदि पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ताओं से अपराधियों जैसा व्यवहार करेंगे, तो समाज का भरोसा कानून व्यवस्था से उठने लगेगा।

बढ़ते मामलों से बिगड़ती पुलिस की छवि

पिछले कुछ समय में अहमदाबाद और गुजरात के अन्य हिस्सों से पुलिस की मारपीट और दुर्व्यवहार के कई वीडियो सामने आ चुके हैं। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी राज्य की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

Ahmedabad News में इस तरह की रिपोर्ट्स लगातार यह दर्शा रही हैं कि पुलिस सुधार और संवेदनशील प्रशिक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

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क्या होगी कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन घटनाओं के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई होगी, या ये मामले भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएंगे।

नागरिकों और मानवाधिकार संगठनों की मांग है कि:

  • दोनों मामलों की स्वतंत्र जांच हो
  • CCTV और मेडिकल रिपोर्ट को सबूत माना जाए
  • दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो
  • पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिले

निष्कर्ष

अहमदाबाद और सूरत की ये घटनाएं केवल दो मामलों की कहानी नहीं हैं, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी हैं। कानून के रखवाले जब कानून तोड़ते नजर आएं, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर होती है।

अब यह सरकार और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह केवल भाषणों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी यह सुनिश्चित करे कि पुलिस वाकई जनता की रक्षक बने, न कि भय का कारण।