असम को मिली विकास की नई रफ्तार: नामरूप में Assam Valley Fertilize परियोजना से बदलेगा उत्तर-पूर्व भारत का औद्योगिक और कृषि भविष्य

🗓️ Published on: December 21, 2025 11:12 pm
Assam Valley Fertilize

डिब्रूगढ़ (असम):
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले के नामरूप में Assam Valley Fertilize परियोजना के तहत अमोनिया-यूरिया उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखकर न केवल असम बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व भारत को औद्योगिक और कृषि विकास की एक नई दिशा दे दी है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “असम ने विकास की नई गति पकड़ ली है और विकसित भारत के निर्माण में इसकी भूमिका निर्णायक होगी।”

यह परियोजना असम वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड (AVFCL) के अंतर्गत स्थापित की जा रही है और इसे किसानों के हित, आत्मनिर्भर भारत और क्षेत्रीय संतुलित विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वीरों और बलिदान की धरती को नमन

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम को वीरों, शौर्य और बलिदान की भूमि बताते हुए कहा कि यह वही धरती है जिसने चाओलुंग सुकाफा, महावीर लचित बोरफुकन जैसे महान नायकों को जन्म दिया। उन्होंने भीमबर देउरी, शहीद कुशल कंवर, मोरान राजा बोडौसा, मालती मेम, इंदिरा मिरी, स्वर्गदेव सर्बानंद सिंह और वीरांगना सती साधनी जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान को याद करते हुए असम की पवित्र मिट्टी को नमन किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भूमि केवल इतिहास की गवाह नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली ताकत भी है।

जनता का अपार स्नेह और असम की खुशबू

प्रधानमंत्री मोदी ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि माताओं-बहनों का स्नेह और आशीर्वाद असम को उनके दिल के बेहद करीब लाता है। उन्होंने विशेष रूप से चाय बागानों से आई महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि असम की चाय की खुशबू उनके और असम के रिश्ते को और गहरा बनाती है।

उन्होंने सभी उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी ताकत है।

असम और उत्तर-पूर्व के लिए ऐतिहासिक दिन

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन असम और पूरे उत्तर-पूर्व भारत के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि नामरूप और डिब्रूगढ़ का वर्षों पुराना सपना आज साकार हुआ है। Assam Valley Fertilize परियोजना के साथ इस क्षेत्र में औद्योगिक पुनर्जागरण का नया अध्याय शुरू हो गया है।

उन्होंने बताया कि एक ओर नामरूप में आधुनिक उर्वरक संयंत्र की नींव रखी गई है, वहीं दूसरी ओर गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन भी किया गया है। यह दोनों परियोजनाएं मिलकर असम को उद्योग और कनेक्टिविटी के मामले में नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।

विकसित भारत में असम की सशक्त भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस तरह अहोम साम्राज्य के दौर में असम की भूमिका सशक्त थी, उसी तरह विकसित भारत में भी असम एक मजबूत स्तंभ बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में नई-नई इंडस्ट्रीज, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर निर्माण, कृषि में नए अवसर, चाय उद्योग का विस्तार और पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं।

Assam Valley Fertilize परियोजना को उन्होंने इसी व्यापक विकास यात्रा का अहम हिस्सा बताया।

किसानों के केंद्र में सरकार की नीति

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत के निर्माण में किसानों और अन्नदाताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार की हर नीति और योजना के केंद्र में किसान का कल्याण है।

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। आने वाले समय में नामरूप का यह नया यूरिया संयंत्र इस आवश्यकता को पूरा करेगा।

11,000 करोड़ रुपये का निवेश, 12 लाख मीट्रिक टन उत्पादन

प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि Assam Valley Fertilize परियोजना में करीब ₹11,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह संयंत्र हर साल 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का उत्पादन करेगा।

स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से न केवल उर्वरक की आपूर्ति तेज होगी, बल्कि परिवहन लागत भी कम होगी, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।

रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया रास्ता

नामरूप इकाई के चालू होने से हजारों युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि संयंत्र में स्थायी नौकरियों के साथ-साथ मरम्मत, आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक गतिविधियों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

यह परियोजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगी और युवाओं को अपने ही राज्य में भविष्य बनाने का अवसर प्रदान करेगी।

अतीत की उपेक्षा और वर्तमान की पहल

प्रधानमंत्री ने सवाल उठाया कि किसानों के हित में ऐसे बड़े कदम पहले क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय नामरूप उर्वरक उत्पादन का बड़ा केंद्र था, जिससे पूरे उत्तर-पूर्व के खेतों को ताकत मिलती थी।

लेकिन समय के साथ तकनीक पुरानी होती गई और पिछली सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। नतीजतन कई इकाइयां बंद हो गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य की वर्तमान सरकारें मिलकर उन गलतियों को सुधार रही हैं।

यूरिया संकट से आत्मनिर्भरता की ओर

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि पहले देश के कई हिस्सों में यूरिया की भारी किल्लत थी। किसान घंटों कतारों में खड़े रहते थे, कई जगह पुलिस तैनात करनी पड़ती थी।

उन्होंने कहा कि जहां पिछली सरकारों के समय उर्वरक कारखाने बंद हो रहे थे, वहीं आज गोरखपुर, सिंदरी, बरौनी, रामागुंडम जैसे स्थानों पर नए संयंत्र शुरू किए गए हैं। निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि

प्रधानमंत्री ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में भारत में केवल 225 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होता था, जो आज बढ़कर लगभग 306 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

देश की कुल जरूरत लगभग 380 लाख मीट्रिक टन है, और सरकार इस अंतर को तेजी से कम कर रही है।

किसानों को सस्ती यूरिया, सरकार उठाती है बोझ

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दामों पर यूरिया आयात करने के बावजूद सरकार किसानों पर इसका बोझ नहीं डालती। जहां एक बोरी यूरिया की लागत लगभग ₹3,000 होती है, वहीं किसान को यह मात्र ₹300 में मिलती है।

बाकी खर्च सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है। साथ ही प्रधानमंत्री ने किसानों से उर्वरकों के संतुलित उपयोग की अपील की ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे।

बीज से बाजार तक किसान के साथ सरकार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज सरकार बीज से लेकर बाजार तक किसान के साथ खड़ी है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक करीब ₹4 लाख करोड़ किसानों के खातों में सीधे भेजे जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि इसी वर्ष किसानों के लिए ₹35,000 करोड़ की दो नई योजनाएं – पीएम धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन – शुरू की गई हैं।

बीमा, MSP और KCC से मजबूती

फसल खराब होने पर फसल बीमा योजना, बेहतर MSP व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के दायरे के विस्तार से किसानों को मजबूती मिली है।

पशुपालक और मछुआरों को भी KCC के तहत शामिल किया गया है और इस वर्ष ₹10 लाख करोड़ से अधिक की सहायता दी गई है।

प्राकृतिक खेती और FPOs को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और तेल पाम मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे खासकर उत्तर-पूर्व के किसानों की आय बढ़ेगी।

चाय बागान श्रमिकों के लिए बदलाव

असम के चाय बागान श्रमिकों के लिए जन-धन खाते, सीधी बैंकिंग सुविधा और बुनियादी ढांचे का विस्तार किया गया है। इससे लाखों परिवारों का जीवन स्तर सुधरा है।

Sabka Saath, Sabka Vikas से गरीबी में कमी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। एक नया नव-मध्यम वर्ग उभरा है, जो विकास की असली पहचान है।

असम की पहचान और गौरव को प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम की संस्कृति, पहचान और गौरव को हर मंच पर सम्मान दिया गया है – चाहे वह लचित बोरफुकन की प्रतिमा हो, भूपेन हजारिका को भारत रत्न देना हो या असम की काली चाय को वैश्विक पहचान दिलाना।

यह भी पढ़े: रेगिस्तान की खामोशी, डरावनी आवाज़ें और 28 घंटे की जंग: अहमदाबाद के डॉक्टर दंपति ने जीती The Hell Race, 161 किलोमीटर का सफर बना जीवन का सबसे कठिन इम्तिहान

नामरूप: पूर्वी भारत के विकास का प्रतीक

प्रधानमंत्री ने कहा कि Assam Valley Fertilize परियोजना केवल असम ही नहीं, बल्कि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक किसानों को लाभ पहुंचाएगी।

यह उत्तर-पूर्व को आत्मनिर्भर भारत का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह भी पढ़े: Zubeen Garg मौत केस में SIT ने दाखिल की चार्जशीट, कजन पर गैर-इरादतन हत्या का आरोप; जांच में कई बड़े खुलासे

निष्कर्ष

नामरूप की यह परियोजना सिर्फ एक उर्वरक संयंत्र नहीं, बल्कि असम और उत्तर-पूर्व भारत के लिए विकास, आत्मनिर्भरता, रोजगार और किसान कल्याण का प्रतीक है।
Assam Valley Fertilize आने वाले वर्षों में क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली परियोजना साबित होगी।