राजकोट और पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और जीवन बदलने वाली पहल के रूप में Khodaldham Cancer Hospital and Research Institute का निर्माण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। श्री खोडलधाम ट्रस्ट-कागवड द्वारा विकसित किया जा रहा यह अत्याधुनिक कैंसर हॉस्पिटल न केवल गुजरात बल्कि पूरे पश्चिम भारत में कैंसर उपचार, शोध और सेवा के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगा।
राजकोट के पास अमरेली गांव के समीप लगभग 43 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाला यह प्रोजेक्ट गरीब, मध्यम वर्ग और जरूरतमंद कैंसर रोगियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। ट्रस्ट का उद्देश्य स्पष्ट है—कैंसर जैसे गंभीर रोग का इलाज अब बड़े महानगरों या विदेशों तक सीमित न रहे, बल्कि सौराष्ट्र के लोगों को उनके घर के पास ही वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं मिल सकें।
तीन साल में तैयार होगा 220 बेड का अत्याधुनिक हॉस्पिटल
श्री खोडलधाम ट्रस्ट के चेयरमैन नरेश पटेल के अनुसार, Khodaldham Cancer Hospital का पहला चरण तीन वर्षों के भीतर पूरा किया जाएगा। इस फेज में कुल 33 एकड़ जमीन पर 220 बेड वाला स्टेट-ऑफ-द-आर्ट कैंसर हॉस्पिटल बनाया जाएगा।
हॉस्पिटल की परिधि दीवार (कंपाउंड वॉल) का निर्माण पूरा हो चुका है और अब मुख्य निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। भविष्य में मरीजों की संख्या और ज़रूरतों को देखते हुए दूसरे और तीसरे चरण में बेड की संख्या, उपचार सुविधाएं और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक विस्तार दिया जाएगा।
एक ही परिसर में डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट और रिसर्च की संपूर्ण सुविधा
Khodaldham Cancer Hospital and Research Institute को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि कैंसर से जुड़ी हर जरूरत एक ही छत के नीचे पूरी हो सके। इसमें शामिल होंगी:
- एडवांस कैंसर स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस
- कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी
- पैथोलॉजी और इमेजिंग की आधुनिक सुविधाएं
- कैंसर रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल यूनिट
- पेलिएटिव केयर और रिहैबिलिटेशन सेवाएं
इस व्यवस्था से मरीजों को जांच, रिपोर्ट, कंसल्टेशन या इलाज के लिए अलग-अलग जगहों पर भटकना नहीं पड़ेगा, जिससे समय, पैसा और मानसिक तनाव—तीनों की बचत होगी।
गरीब और मध्यम वर्ग के लिए टोकन रेट पर वर्ल्ड-क्लास इलाज
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका सामाजिक उद्देश्य है। नरेश पटेल ने स्पष्ट किया है कि Khodaldham Cancer Hospital में गरीब मरीजों को या तो बिल्कुल मुफ्त या बेहद नाममात्र शुल्क (टोकन रेट) पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
मध्यम वर्गीय परिवार, जो अक्सर महंगे कैंसर इलाज के कारण आर्थिक संकट में आ जाते हैं, उनके लिए यह हॉस्पिटल किसी वरदान से कम नहीं होगा। ट्रस्ट का लक्ष्य मुनाफा नहीं, बल्कि सेवा है—और यही सोच इस पूरे प्रोजेक्ट को खास बनाती है।
अब मुंबई, दिल्ली या अहमदाबाद जाने की मजबूरी नहीं
अब तक सौराष्ट्र के कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद या चेन्नई जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था। इससे न सिर्फ इलाज का खर्च बढ़ता था, बल्कि रहने, खाने और यात्रा का बोझ भी मरीज और उसके परिवार पर पड़ता था।
Khodaldham Cancer Hospital के शुरू होने के बाद यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। यहां वही आधुनिक तकनीक, वही विशेषज्ञ डॉक्टर और वही अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो अब तक केवल बड़े शहरों तक सीमित थीं।
विदेशी मशीनरी और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से होगा इलाज
हॉस्पिटल में कैंसर उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली महंगी और अत्याधुनिक मशीनें विदेशों से आयात की जाएंगी। इनमें वे उपकरण भी शामिल होंगे, जो अभी भारत के बहुत कम हॉस्पिटल्स में उपलब्ध हैं।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को इलाज के लिए किसी दूसरे देश या शहर में न जाना पड़े और उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा अपने ही क्षेत्र में मिल सके।
मरीजों और उनके परिवारों के लिए रहने-खाने की पूरी व्यवस्था
Khodaldham Cancer Hospital and Research Institute को केवल एक हॉस्पिटल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण हीलिंग कैंपस के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां मरीजों के साथ आने वाले परिवारजनों के लिए:
- रहने की सुविधा
- किफायती और पौष्टिक भोजन
- साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण
जैसी व्यवस्थाएं भी की जाएंगी, ताकि इलाज के दौरान मरीज और उसके परिजन मानसिक रूप से अधिक मजबूत महसूस कर सकें।
मेडिटेशन हॉल और ऑडिटोरियम: मानसिक स्वास्थ्य पर भी जोर
कैंसर केवल शारीरिक बीमारी नहीं है, यह मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मरीज को प्रभावित करता है। इसी सोच के साथ हॉस्पिटल परिसर में एक मेडिटेशन हॉल और ऑडिटोरियम भी बनाया जाएगा।
मेडिटेशन और मानसिक शांति को इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सकारात्मक मानसिक स्थिति दवाओं के असर को भी बेहतर बनाती है।
सौराष्ट्र में कैंसर के आंकड़े और इस हॉस्पिटल की जरूरत
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से जुड़े पद्मश्री डॉ. राजेंद्र अच्युत बडवे ने बताया कि सौराष्ट्र क्षेत्र में हर एक लाख की आबादी पर लगभग 60 से 70 कैंसर मरीज पाए जाते हैं।
हालांकि यह आंकड़ा अमेरिका और इंग्लैंड जैसे पश्चिमी देशों की तुलना में कम है, लेकिन भारत में जागरूकता और शुरुआती जांच की कमी के कारण कई मरीज देर से सामने आते हैं। ऐसे में Khodaldham Cancer Hospital जैसे संस्थान समय पर जांच और इलाज के जरिए हजारों जानें बचा सकते हैं।
पद्मश्री डॉ. राजेंद्र बडवे की गाइडेंस में हो रहा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण पद्मश्री डॉ. राजेंद्र बडवे के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। डॉ. बडवे अब तक टाटा ग्रुप के 10 प्रमुख हॉस्पिटल्स के निर्माण में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
उनकी विशेषज्ञता और अनुभव इस बात की गारंटी है कि Khodaldham Cancer Hospital and Research Institute अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरेगा।
फाइनल मास्टर प्लान का भव्य लॉन्च
20 दिसंबर को राजकोट में इस कैंसर हॉस्पिटल का फाइनल मास्टर प्लान प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर ट्रस्ट के सदस्य, उद्योगपति, डॉक्टर, सामाजिक नेता और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
यह कार्यक्रम केवल एक प्लान का लॉन्च नहीं था, बल्कि सौराष्ट्र के भविष्य के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूत नींव रखने का प्रतीक था।
सौराष्ट्र के लिए उम्मीद की नई किरण
कुल मिलाकर, Khodaldham Cancer Hospital केवल एक मेडिकल प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। यह पहल यह साबित करती है कि जब सेवा, समर्पण और आधुनिक तकनीक एक साथ आती हैं, तो समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भी विश्व-स्तरीय सुविधाएं मिल सकती हैं।
राजकोट और पूरे सौराष्ट्र के लिए यह हॉस्पिटल आने वाले वर्षों में हजारों परिवारों की ज़िंदगी बदलने वाला साबित होगा—एक ऐसी जगह, जहां इलाज के साथ-साथ इंसानियत, करुणा और आशा भी मिलेगी।










