भारत–नीदरलैंड्स के बीच ऐतिहासिक समझौता: लोथल में National Maritime Heritage Complex के विकास की दिशा में बड़ा कदम

📝 Last updated on: December 26, 2025 1:42 am
National Maritime Heritage Complex

नई दिल्ली / लोथल (गुजरात):
भारत और नीदरलैंड्स ने समुद्री विरासत के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उसके प्रचार को लेकर एक ऐतिहासिक पहल की है। दोनों देशों ने गुजरात के लोथल में प्रस्तावित National Maritime Heritage Complex (NMHC) के विकास के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारत की हजारों वर्ष पुरानी समुद्री परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

यह MoU भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वैन वील के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान औपचारिक रूप से आदान-प्रदान किया गया। इस समझौते के तहत भारत के National Maritime Heritage Complex, जिसे केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है, और एम्स्टर्डम स्थित प्रतिष्ठित National Maritime Museum के बीच सहयोग स्थापित किया गया है।

समुद्री विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की साझा पहल

भारत और नीदरलैंड्स दोनों ही देशों का समुद्री इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रहा है। भारत प्राचीन काल से ही समुद्री व्यापार, बंदरगाहों और नौवहन तकनीकों के लिए जाना जाता रहा है, वहीं नीदरलैंड्स ने मध्यकाल और औपनिवेशिक युग में वैश्विक समुद्री व्यापार में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में यह साझेदारी दोनों देशों की ऐतिहासिक समुद्री विरासत को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है।

MoU के तहत दोनों देश समुद्री संग्रहालयों की रूपरेखा, डिजाइन, संरक्षण और क्यूरेशन से जुड़े अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करेंगे। इससे National Maritime Heritage Complex को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में मदद मिलेगी और यह विश्व के प्रमुख समुद्री संग्रहालयों की श्रेणी में शामिल हो सकेगा।

लोथल: भारत की प्राचीन समुद्री सभ्यता का प्रतीक

गुजरात के अहमदाबाद जिले में स्थित लोथल, सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख और ऐतिहासिक बंदरगाह नगर रहा है। लगभग 2500 ईसा पूर्व का यह स्थल दुनिया के सबसे पुराने ज्ञात डॉकयार्ड्स में से एक माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, लोथल से मेसोपोटामिया, फारस और अन्य क्षेत्रों के साथ समुद्री व्यापार होता था।

प्रस्तावित National Maritime Heritage Complex का उद्देश्य इसी गौरवशाली इतिहास को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना है। यह परिसर भारत की लगभग 4,500 साल पुरानी समुद्री यात्रा, व्यापार मार्गों, जहाज निर्माण परंपराओं और नौवहन तकनीकों को दर्शाएगा।

विश्वस्तरीय संग्रहालय और आधुनिक तकनीक का संगम

इस परियोजना को केवल एक पारंपरिक संग्रहालय तक सीमित नहीं रखा गया है। National Maritime Heritage Complex को एक अत्याधुनिक सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां इतिहास, तकनीक और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

नीदरलैंड्स के National Maritime Museum के सहयोग से यहां इंटरैक्टिव गैलरी, डिजिटल आर्काइव, वर्चुअल रियलिटी अनुभव और आधुनिक प्रदर्शनी तकनीकों को अपनाया जाएगा। इसका उद्देश्य आगंतुकों को समुद्री इतिहास से जोड़ना और उसे रोचक व सजीव बनाना है, खासकर युवा पीढ़ी के लिए।

शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर विशेष जोर

MoU के तहत दोनों देशों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाएं, शैक्षणिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक आदान-प्रदान गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। समुद्री पुरातत्व, नौवहन इतिहास और वैश्विक व्यापार मार्गों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस साझेदारी से छात्रों, शोधकर्ताओं और इतिहासकारों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता तक पहुंच मिलेगी। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि National Maritime Heritage Complex आम जनता, विशेषकर छात्रों, स्थानीय समुदायों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सुलभ और किफायती बना रहे।

केंद्रीय मंत्री का बयान: भारत की विरासत को वैश्विक मंच

केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस समझौते को भारत की समुद्री विरासत के लिए एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड्स के साथ यह सहयोग भारत को संरक्षण, क्यूरेशन और संग्रहालय डिजाइन के क्षेत्र में विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के उस विज़न के अनुरूप है, जिसमें विरासत और नवाचार को साथ जोड़कर शिक्षा, पर्यटन और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। National Maritime Heritage Complex इसी सोच का एक जीवंत उदाहरण बनेगा।

भारत–नीदरलैंड्स संबंधों को नई मजबूती

यह MoU केवल सांस्कृतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और नीदरलैंड्स के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को भी नई दिशा देता है। बैठक के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने समुद्री और शिपिंग सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।

इन चर्चाओं में ग्रीन शिपिंग, टिकाऊ बंदरगाह विकास, जहाज निर्माण और समुद्री नवाचार जैसे विषय शामिल थे। दोनों देशों ने पर्यावरण संरक्षण और सतत समुद्री विकास के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

गुजरात में पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा

लोथल में National Maritime Heritage Complex के विकसित होने से गुजरात में पर्यटन को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

इसके साथ ही, बुनियादी ढांचे के विकास, परिवहन सुविधाओं और पर्यटन सेवाओं में सुधार से आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास होगा। यह परियोजना न केवल ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी लाभ पहुंचाएगी।

भावी पीढ़ियों के लिए समुद्री इतिहास का संरक्षण

यह समझौता इस बात को रेखांकित करता है कि समुद्री विरासत केवल अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य से भी गहराई से जुड़ी हुई है। National Maritime Heritage Complex के माध्यम से भारत अपनी समुद्री पहचान को पुनः स्थापित करेगा और आने वाली पीढ़ियों को इससे जोड़ने का प्रयास करेगा।

यह परिसर एक ऐसा मंच बनेगा, जहां प्राचीन डॉकयार्ड्स से लेकर आधुनिक शिपिंग और समुद्री पर्यावरण संरक्षण तक की पूरी यात्रा को दर्शाया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग का उदाहरण

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नीदरलैंड्स के बीच यह समझौता अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ऐतिहासिक संसाधनों और तकनीकी विशेषज्ञता का यह मेल वैश्विक स्तर पर समुद्री विरासत संरक्षण के लिए एक नई मिसाल पेश करेगा।

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निष्कर्ष: एक वैश्विक समुद्री धरोहर की ओर

इस MoU के साथ ही National Maritime Heritage Complex को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की दिशा में ठोस आधार तैयार हो गया है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत की समुद्री विरासत को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी।

भारत के लिए यह अपनी ऐतिहासिक समुद्री भूमिका को पुनः उजागर करने का अवसर है, वहीं नीदरलैंड्स के लिए यह एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के साथ सांस्कृतिक सहयोग को गहरा करने का माध्यम है। दोनों देशों की यह संयुक्त पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए समुद्र से जुड़ी मानव सभ्यता की कहानी को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।