PMO का नया नाम Seva Tirtha: पूरे देश में राजभवन होंगे-लोक भवन-मोदी बोले- देश सत्ता नहीं, सेवा की दिशा में आगे बढ़ रहा है

📝 Last updated on: December 2, 2025 5:42 pm
Seva Tirtha

Seva Tirtha: (सेवा तीर्थ)देश की प्रशासनिक पहचान को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का आधिकारिक नाम अब “Seva Tirtha” कर दिया गया है। इसके साथ ही देशभर के राजभवनों का नाम बदलकर “लोक भवन”(lok bhavan) और केंद्रीय सचिवालय का नाम “कर्तव्य भवन”(kartavy bhavan) रखा गया है।

सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक परिवर्तन का प्रतीक है, जो भारतीय शासन-व्यवस्था को “सत्ता से सेवा” की ओर ले जाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को दर्शाता है।

‘सत्ता से सेवा’: सरकार का नया सांस्कृतिक दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत में प्रशासनिक ढाँचे में अब एक “बड़ी सांस्कृतिक क्रांति” की शुरुआत हो चुकी है। सार्वजनिक संस्थानों में ऐसी पहचान विकसित की जा रही है जो आम नागरिकों को केंद्र में रखकर बनाई गई है।

इससे पहले भी केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण भवनों और मार्गों के नाम बदल चुकी है।

  • राजपथ का नाम 2022 में बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया था।
  • प्रधानमंत्री आवास का नाम पहले Race Course Road था, जिसे 2016 में बदलकर Lok Kalyan Marg किया गया था।

सरकार का कहना है कि नए नाम भारतीय संस्कृति, जनता-केन्द्रित शासन और संवैधानिक मूल्यों को अधिक सशक्त रूप से व्यक्त करते हैं।

राजभवन का नाम क्यों बदला?

गृहमंत्रालय के अनुसार, पिछले वर्ष राज्यपालों के सम्मेलन में यह बात सामने आई थी कि “राजभवन” शब्द उपनिवेशवादी मानसिकता को दर्शाता है। इसीलिए अब राज्यपाल और उपराज्यपाल की आधिकारिक कार्यालय और आवास को क्रमशः लोक भवन और लोक निवास कहा जाएगा।

सरकार का मानना है कि इन नए नामों से संस्थान जनता के और अधिक करीब महसूस होंगे।

PMO का स्थानांतरण: 78 साल पुराने South Block से बाहर आएगा कार्यालय

नाम बदलने के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय जल्द ही नई लोकेशन में स्थानांतरित होने वाला है। PMO अब 78 वर्ष पुराने South Block परिसर से निकलकर एक अत्याधुनिक नए कैंपस Seva Tirtha में शिफ्ट किया जाएगा।

यह परिवर्तन Central Vista पुनर्विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 14 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टी.वी. सॉमनाथन पहले ही Seva Tirtha-2 में सैन्य प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर चुके हैं।

Seva Tirtha में क्या-क्या सुविधाएँ होंगी?

नया प्रशासनिक कैंपस तीन मुख्य ज़ोन में विभाजित होगा:

1. Seva Tirtha-1

  • यहीं से प्रधानमंत्री कार्यालय काम करेगा।
  • यह अत्याधुनिक तकनीक, सुरक्षा और तेज़ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर आधारित परिसर होगा।

2. Seva Tirtha-2

  • इस ब्लॉक में कैबिनेट सचिवालय स्थित होगा।
  • उच्चस्तरीय बैठकों और सामरिक निर्णयों के लिए यह मुख्य केंद्र बनेगा।

3. Seva Tirtha-3

  • यहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय होगा।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक नीतियों पर काम करने वाली सभी बड़ी इकाइयाँ यहीं से संचालित होंगी।

कर्तव्य पथ के आसपास प्रशासनिक ज़ोन में बड़े बदलाव

सरकार का लक्ष्य है कि कर्तव्य पथ (पूर्व राजपथ) के 3 किलोमीटर क्षेत्र को एक आधुनिक, पैदल चलने योग्य और एकीकृत सरकारी ज़ोन के रूप में विकसित किया जाए। इस परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा है

Common Central Secretariat (CCS)

जिसका नया नाम अब “कर्तव्य भवन” है।

यहाँ 10 नए कार्यालय ब्लॉक तैयार किए गए हैं। इनमें वे सभी मंत्रालय शिफ्ट होंगे जो फिलहाल पुराने भवनों — जैसे शास्त्री भवन, निर्माण भवन, कृषि भवन — में फैले हुए हैं।

एक CSS ब्लॉक पहले ही चालू हो चुका है, जबकि अन्य तीन भी उपयोग के लिए तैयार हैं।

North Block और South Block का नया रूप: ‘Yug-Yugeen Bharat Sangrahalaya’

सेंट्रल विस्टा योजना के अंतर्गत ऐतिहासिक North Block और South Block को भविष्य में बड़े संग्रहालयों में बदलने की तैयारी चल रही है। इन्हें एक भव्य नाम “युग-युगीन भारत संग्रहालय” दिया जाएगा।

इसके लिए फ्रांस की प्रसिद्ध म्यूज़ियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ एक समझौता भी किया गया है। इन संग्रहालयों में भारत के प्राचीन इतिहास से लेकर आधुनिक लोकतंत्र तक की यात्रा को अत्याधुनिक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।

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भारत के प्रशासनिक दर्शन में परिवर्तन का संकेत

इन सभी नामों-Seva Tirtha, Lok Bhavan, Lok Nivas, Kartavya Bhavan-के पीछे एक स्पष्ट संदेश है:
सरकार ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना चाहती है जो जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।

प्रधानमंत्री मोदी कई बार कह चुके हैं कि भारत की शासन-व्यवस्था को उपनिवेशवादी प्रतीकों से मुक्त करके उसे भारतीय मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।