Namo Shree Yojana: गुजरात सरकार की बड़े पैमाने पर शुरू की गई मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य क्रांति

🗓️ Published on: December 4, 2025 3:10 pm
Namo Shree Yojana

Namo Shree Yojana: गुजरात सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित मातृत्व को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Namo Shree Yojana शुरू की है। यह योजना गुजरात राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा संचालित एक प्रमुख कल्याणकारी पहल है, जिसका उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण स्तर को मजबूत बनाना, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करना है।

भारत में वर्षों से माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई चुनौतियाँ सामने आती रही हैं-एनीमिया, कुपोषण, कम वजन वाले बच्चों का जन्म, सुरक्षित प्रसव में कठिनाइयाँ और पोषण की कमी जैसी समस्याएँ सबसे बड़ी बाधाएँ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए गुजरात सरकार ने Namo Shree Yojana के माध्यम से वित्तीय सहायता, तकनीकी पारदर्शिता और जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार किया है।

योजना शुरू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

गुजरात में अनेक इलाकों में गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण न मिल पाने से मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में पौष्टिक भोजन की कमी, मेडिकल जांच न हो पाना और आवश्यक दवाओं का खर्च उठाना मुश्किल था।

इसके परिणामस्वरूप

  • एनीमिया की दर बढ़ रही थी
  • कुपोषण के मामले बढ़ रहे थे
  • जन्म के समय बच्चों का वजन कम होता था
  • प्रसव के जोखिम बढ़ जाते थे

इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया कि गर्भवती महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे पौष्टिक भोजन, चिकित्सा जांच और आवश्यक देखभाल प्राप्त कर सकें। इस उद्देश्य से Namo Shree Yojana को वर्ष 2024 में लॉन्च किया गया।

योजना का मुख्य उद्देश्य

Namo Shree Yojana का प्रमुख लक्ष्य है:

  • गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना
  • मातृ पोषण में सुधार करना
  • एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं को कम करना
  • सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना
  • जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की समस्या कम करना
  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली तैयार करना

सरकार का मानना है कि गर्भ में पल रहा शिशु तभी स्वस्थ जन्म ले सकता है जब उसकी मां शारीरिक रूप से मजबूत और पोषित हो। यही कारण है कि योजना में आर्थिक सहायता को सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जमा किया जाता है।

योजना के प्रमुख लाभ: आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों पर असर

1. आर्थिक सहायता

योजना के तहत प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला को कुल ₹12,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उनके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में जमा की जाती है।

2. स्वास्थ्य लाभ

  • महिलाओं को पौष्टिक भोजन खरीदने में आसानी
  • नियमित जांच और आवश्यक दवाएँ उपलब्ध
  • एनीमिया की दर में कमी
  • कुपोषण जैसी समस्याओं में सुधार
  • मातृ और नवजात स्वास्थ्य में समग्र बढ़ोतरी

योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह गर्भ में पल रहे बच्चे की नींव को मजबूत बनाती है।

योजना के लिए पात्र कौन हैं?

Namo Shree Yojana का लाभ सिर्फ उन गर्भवती महिलाओं को मिलेगा जो निम्नलिखित 11 श्रेणियों में से किसी एक में आती हैं:

  1. अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाएं
  2. NFSA (National Food Security Act) वाले परिवार
  3. PM-JAY (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) कार्ड धारक परिवार
  4. BPL कार्डधारक
  5. ई-श्रम कार्ड वाले श्रमिक परिवार
  6. दिव्यांग महिलाएं
  7. मनरेगा जॉब कार्डधारक परिवार
  8. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि वाले किसान परिवार
  9. ₹8 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार
  10. आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/तेडागर
  11. मध्यमवर्गीय परिवार (सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर)

कौन योजना से वंचित रहेगा?

योजना का लाभ निम्नलिखित को नहीं मिलेगा:

  • वे महिलाएं जो उपरोक्त 11 पात्रता श्रेणियों में नहीं आतीं
  • अवैध/कानूनी उम्र से कम आयु में विवाह करने वाली महिलाएं
  • परिवार के तीसरे बच्चे के लिए यह सहायता नहीं दी जाएगी
  • सरकारी कर्मचारी परिवारों की महिलाएं

इससे स्पष्ट होता है कि योजना का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवार हैं।

क्या योजना के लिए कोई फीस देनी होती है?

नहीं।
योजना पूरी तरह निःशुल्क है।

राज्य सरकार ने 2024–25 के बजट में ₹750 करोड़ की भारी राशि इस योजना के लिए निर्धारित की है। लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की फीस, चार्ज या कमीशन नहीं देना होता है।

योजना में आवेदन कैसे करना है?

लाभ लेने के लिए किसी अलग फॉर्म की आवश्यकता नहीं है। प्रक्रिया पूरी तरह सरल है:

नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र

या

नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC/सरकारी अस्पताल)

में गर्भावस्था की रजिस्ट्रेशन करवानी होती है।

रजिस्ट्रेशन के बाद

  • आशा कार्यकर्ता / FHW / आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
    महिला की पूरी जानकारी e-Mamta सॉफ्टवेयर में दर्ज करते हैं।
  • सॉफ्टवेयर पात्रता की ऑटोमेटिक जांच करता है।
  • पात्र होने पर महिला स्वतः योजना में शामिल हो जाती है।

कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं?

रजिस्ट्रेशन के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता निम्नलिखित दस्तावेजों की जानकारी लेता है:

  • आधार कार्ड (महिला और पति का)
  • बैंक पासबुक (आधार से लिंक होना अनिवार्य)
  • पात्रता साबित करने वाले दस्तावेज (जैसे जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, PM-JAY कार्ड आदि)
  • निवास प्रमाण

दस्तावेज सत्यापन के बाद सहायता राशि चरणबद्ध रूप से बैंक खाते में आती है।

DBT के माध्यम से सहायता कब मिलती है?

पात्रता सत्यापित होते ही सहायता राशि निम्न चरणों में महिला के खाते में जमा होती है

  • गर्भावस्था के अलग-अलग चरण
  • प्रसव के बाद का चरण

सरकार यह सुनिश्चित करती है कि राशि समय पर उपयोग के लिए उपलब्ध रहे।

अगर योजना में कोई गड़बड़ी लगे तो शिकायत कैसे करें?

यदि लाभार्थी को किसी स्तर पर समस्या या गड़बड़ी महसूस हो, तो वह:

  1. आशा कार्यकर्ता
  2. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
  3. नजदीकी PHC के मेडिकल ऑफिसर

से शिकायत कर सकती है।

यदि समाधान न मिले, तो:

  • तालुका स्वास्थ्य अधिकारी (THO)
  • मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CDHO)
    के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

हालांकि इसके लिए अभी अलग से कोई समर्पित हेल्पलाइन नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के मौजूदा नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

यदि महत्वपूर्ण दस्तावेज खो जाएं तो क्या करें?

यदि पासबुक या आधार कार्ड जैसी कोई जानकारी खो जाती है

  • नई कॉपी प्राप्त करने के बाद
  • आशा/आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को सूचित करना आवश्यक है
    ताकि e-Mamta सॉफ्टवेयर में जानकारी अपडेट हो सके।

योजना की संपूर्ण प्रक्रिया: डिजिटल और पारदर्शी

  1. e-Mamta पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
  2. सॉफ्टवेयर द्वारा पात्रता जांच
  3. DBT के माध्यम से बैंक खाते में सहायता

योजना की डिजिटल पारदर्शिता इसे अन्य योजनाओं से अलग बनाती है।

योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

1. आर्थिक प्रभाव

सितंबर 2025 तक:

  • ₹354 करोड़ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं।
  • इस राशि से स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी गति आई है।
  • स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च बढ़ने से समग्र जीवन स्तर सुधरा है।

2. स्वास्थ्य पर असर

NFHS–5 के अनुसार:

  • 62.6% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थीं
  • लगभग 31.3% बच्चे कम वजन के जन्म लेते थे

Namo Shree Yojana के बाद:

  • एनीमिया में कमी की स्पष्ट उम्मीद
  • कुपोषण में सुधार
  • नवजात के जन्म वजन में बढ़ोतरी
  • सुरक्षित प्रसव की दर बढ़ने की संभावना

योजना से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े (31 सितंबर 2025 तक)

  • कुल दर्ज लाभार्थी: ~11 लाख
  • सहायता प्राप्त करने वाली महिलाएं: 6.21 लाख+
  • प्रति महिला कुल सहायता राशि: ₹12,000
  • कुल राजकीय बजट आवंटन: ₹750 करोड़

यह आँकड़े बताते हैं कि योजना बेहद कम समय में बड़ी सफलता हासिल कर चुकी है।

योजना की सफलता के प्रमुख कारण

1. व्यापक पहुंच

सिर्फ 18 महीनों में 11 लाख से अधिक महिलाओं का रजिस्ट्रेशन बताता है कि यह योजना ग्रामीण और शहरी-दोनों क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

2. राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति

पहले ही वर्ष में ₹750 करोड़ का बजट आवंटन बताता है कि सरकार मातृ स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

3. जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क

  • आशा कार्यकर्ता
  • आंगनवाड़ी नेटवर्क
  • e-Mamta डिजिटल प्रणाली

ये सभी योजना को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

भविष्य में योजना के संभावित परिणाम

हालांकि Namo Shree Yojana अभी अपने शुरुआती वर्षों में है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों, वर्तमान प्रगति और लागू मॉडल देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले वर्षों में

  • मातृ मृत्यु दर में बड़ी कमी आएगी
  • कुपोषण के मामलों में सुधार होगा
  • एनीमिया का प्रतिशत तेजी से गिरेगा
  • नवजात शिशु मृत्यु दर कम होगी
  • सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी आएगी

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह योजना पूरे भारत के लिए एक मॉडल बन सकती है।

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निष्कर्ष

Namo Shree Yojana सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि मातृत्व सुरक्षा, पोषण सुधार और स्वस्थ समाज की दिशा में उठाया गया क्रांतिकारी कदम है। गुजरात सरकार के इस प्रयास ने लाखों महिलाओं को आर्थिक मजबूती, पौष्टिक आहार की सुविधा और सुरक्षित मातृत्व प्रदान किया है। मजबूत डिजिटल ढांचे, पारदर्शी DBT प्रणाली और जमीनी स्तर की दक्षता के साथ यह योजना देश में मातृ स्वास्थ्य सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।

आने वाले वर्षों में इसकी सफलता न केवल गुजरात को बल्कि पूरे देश को प्रेरित करेगी, जिससे हर मां और हर बच्चा एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य प्राप्त कर सके।