डांग ज़िले के मुख्यालय Dang Ahwa में रहने वाले सोशल वर्कर ज़ाकिर झंकार आज पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। आमतौर पर समाज सेवा का दौर अक्सर किसी संस्था, कार्यक्रम या कैंपेन तक सीमित माना जाता है, लेकिन ज़ाकिर झंकार की ज़िंदगी इस सोच से कहीं आगे निकल जाती है। वे सिर्फ़ एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि इंसानियत, करुणा और त्याग का जीवंत चेहरा हैं।
बहन की मौत के बाद पाँच अनाथ बच्चों की ज़िम्मेदारी उठाई
सालों पहले, ज़ाकिर झंकार की बहन का अचानक निधन हो गया। यह वह क्षण था, जिसने न सिर्फ़ परिवार को हिला दिया, बल्कि चार छोटी बेटियों और एक छोटे बेटे का पूरा भविष्य अंधकार में डूब गया। उन मासूम बच्चों के सिर से पल भर में माँ-बाप का साया उठ गया। ऐसे कठिन समय में, जहाँ कई लोग सिर्फ़ सहानुभूति देते हैं, वहीं ज़ाकिर झंकार ने आगे बढ़कर बच्चों के “मामा” नहीं, बल्कि “फ़ॉस्टर फादर” बनकर पूरी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।
Dang Ahwa में रहने वाले इस साधारण इंसान ने एक असाधारण फैसला लिया-पाँचों बच्चों को अपनी संतान की तरह पालने का, उनके भविष्य को सुरक्षित करने का और उन्हें जीवन के हर पड़ाव पर साथ खड़े रहने का।

मुमताज़बेन का त्याग-एक ऐसी प्रेरणा, जिसे समाज लंबे समय तक याद रखेगा
इस जीवन यात्रा में ज़ाकिर झंकार के साथ उनकी बहन मुमताज़बेन भी खड़ी रहीं। मुमताज़बेन ने एक ऐसा निर्णय लिया, जो आज के समय में बेहद दुर्लभ है। उन्होंने बच्चों की परवरिश और घर की जिम्मेदारी निभाने के लिए जीवनभर शादी न करने का फैसला किया।
उनका यह त्याग बताता है कि इंसानियत सिर्फ़ मदद करने में नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाले निर्णय लेने में भी बसती है। मुमताज़बेन का योगदान इन पाँच बच्चों के भविष्य की रीढ़ साबित हुआ।
जवानी का हर सपना बच्चों के भविष्य को समर्पित किया
ज़ाकिर झंकार ने कभी अपने सपनों, मौज-मस्ती, आराम या निजी जीवन को प्राथमिकता नहीं दी। उनकी नज़र में ड्यूटी सबसे पहले थी-वह ड्यूटी, जिसे उन्होंने समाज या सरकार की तरफ़ से नहीं, बल्कि इंसानियत की तरफ़ से स्वीकार किया था।
कम आय होने के बावजूद, उन्होंने पाँचों बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। बेहतर स्कूल, कॉलेज फीस, रहने-सहने की व्यवस्था-हर जगह उन्होंने खुद को बच्चों की ढाल बनाकर खड़ा किया।
आज, उनके इसी समर्पण का नतीजा है कि पाँचों बच्चे अपने पैरों पर मजबूती से खड़े हैं:
- पहली बेटी – टीचर
- दूसरी बेटी – गायनेकोलॉजिस्ट (डॉक्टर)
- तीसरी बेटी – BCA और MCA ग्रेजुएट
- चौथी बेटी – लैब टेक्नीशियन
- बेटा – B.Sc IT ग्रेजुएट
चार बेटियों में से दो की शादी हो चुकी है, तीसरी की शादी की तैयारी चल रही है। यह उपलब्धि सिर्फ़ बच्चों की नहीं, बल्कि ज़ाकिर झंकार के त्याग और संघर्ष की जीत है।
सर्वधर्म समभाव-हर जाति और धर्म के लिए समान सम्मान
Dang Ahwa का यह सामाजिक कार्यकर्ता सभी धर्मों और समाज के प्रत्येक वर्ग के बीच समानता और भाईचारे की मिसाल है। मंदिर हो, मस्जिद हो या चर्च-ज़ाकिर झंकार हर जगह एक जैसी आस्था और सम्मान रखते हैं। इसी वजह से समाज के हर धर्म और समुदाय के लोग उन्हें दिल से सम्मान देते हैं।
उनके लिए समाज सेवा कोई पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।
सालों से इंसानियत की सेवा-हर संकट में सबसे पहले पहुँचने का विश्वास
डांग ज़िले में जब भी किसी को मदद की जरूरत होती है, लोगों के मन में सबसे पहला नाम आता है-ज़ाकिर झंकार। वे कई वर्षों से अनेक मानवीय सेवाएँ करते आ रहे हैं:
- गरीब और गंभीर मरीज़ों को हॉस्पिटल पहुँचाना
- ज़रूरत पड़ने पर खुद खून दान करना या खून की व्यवस्था करना
- अत्यंत बीमार लोगों को दूसरे शहरों के हॉस्पिटल तक सुरक्षित पहुँचाना
- आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की नगद सहायता
- लावारिस या अनजान शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार
- सांप, अजगर जैसे खतरनाक रेंगने वाले जीवों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ना
- गरीब बेटियों की शादी में मंडप या अन्य व्यवस्था में मदद
कोरोना महामारी के दौरान अद्भुत सेवा
कोविड-19 महामारी के बीच, जहाँ लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे थे, वहीं ज़ाकिर झंकार दिन-रात मैदान में सक्रिय रहे। उन्होंने संक्रमित मरीजों की मदद की, शवों को सुरक्षित तरीके से अंतिम विदाई दी और अनेक परिवारों का सहारा बने। यह कार्य साहस, मानवता और कर्तव्य भावना की गहरी मिसाल है।
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Dang Ahwa की पहचान-इंसानियत का सबसे चमकता चेहरा
आज ज़ाकिर झंकार सिर्फ़ Dang Ahwa ही नहीं, बल्कि पूरे डांग ज़िले के लिए गर्व का प्रतीक हैं। उनका जीवन कहता है कि इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, सेवा का कोई जाति नहीं होती और त्याग किसी विशेष वर्ग का नहीं होता।
उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है
“सबसे बड़ी पूजा सेवा है और सबसे बड़ा धर्म मानवता।”
ज़ाकिर झंकार का जीवन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि समाज को बदलने के लिए बड़ी ताकत की नहीं, बल्कि बड़ा दिल होने की जरूरत होती है।













