Sartanpar Port: भावनगर जिले के तलाजा तहसील में स्थित सरताणपर गांव इन दिनों चर्चा में रहा, जब अफ्रीकी देशों से आए छात्रों के एक समूह ने यहां के प्रसिद्ध Sartanpar port का दौरा किया। छात्रों का यह शैक्षणिक दौरा स्थानीय जीवनशैली, समुद्री व्यवसाय और मछली पकड़ने की परंपराओं को समझने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। दोपहर बाद पहुंचे इस समूह ने पूरे बंदरगाह का निरीक्षण किया और गांव के आर्थिक ढांचे को करीब से जाना।
Sartanpar Port
Sartanpar गांव तलाजा का सबसे अधिक जनसंख्या वाला तटीय गांव माना जाता है। यहां हजारों की संख्या में रहने वाले मछुआरे समुद्र में जाकर मछली पकड़ने को अपनी मुख्य आजीविका मानते हैं। इसी कारण यह क्षेत्र न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था बल्कि भावनगर जिले की समुद्री फिश सप्लाई चेन का भी अहम हिस्सा है। गांव में मौजूद बड़ा मछली बाजार यहां की पहचान माना जाता है, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में समुद्री उत्पादों की खरीद-फरोख्त होती है।
दौरे के दौरान छात्रों को बोट संचालन, मछली पकड़ने के पारंपरिक तरीकों, दिनभर चलने वाली बाजार गतिविधियों और समुद्री उत्पादों के वितरण सिस्टम की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने यह भी समझा कि किस प्रकार स्थानीय समुदाय समुद्र पर निर्भर रहते हुए अपनी पीढ़ियों से चली आ रही जीविका को आगे बढ़ा रहा है।
अफ्रीकी छात्रों ने माना कि यह अनुभव उनके लिए बेहद उपयोगी रहा, क्योंकि इससे उन्हें भारत के तटीय गांवों के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को समझने का अवसर मिला। कई छात्रों ने यह भी कहा कि भविष्य में वे शोध एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए दोबारा visit Sartanpar port करना चाहेंगे।
इस शैक्षणिक भ्रमण ने न केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों को वास्तविक जमीनी अनुभव प्रदान किया बल्कि सरताणपर गांव और उसके मछुआरा समुदाय की जीवंत संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।










