What is Muharram? : इस्लामी नए वर्ष के पहले पवित्र महीने की सम्पूर्ण जानकारी

🗓️ Published on: December 9, 2025 11:03 pm
What is Muharram

What is Muharram: दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए नया हिजरी वर्ष न सिर्फ़ एक कैलेंडर की शुरुआत है, बल्कि आत्मिक नवीनीकरण, इबादत और इतिहास की गहरी यादों से भरा एक महत्वपूर्ण समय है। हर साल जब नया चाँद दिखाई देता है, तो इसी क्षण से इस्लामी वर्ष का पहला महीना मुहर्रम आरम्भ हो जाता है-एक ऐसा महीना जिसे कुरआन और हदीस दोनों में अत्यंत आदर और पवित्रता का दर्जा दिया गया है। इस लेख का मुख्य उद्देश्य है-गहराई से समझना कि What is Muharram?, इसकी ऐतिहासिक जड़ें क्या हैं, मुसलमान इसे कैसे मनाते हैं और यह महीना कितना आध्यात्मिक महत्व रखता है।

मुहर्रम सिर्फ़ एक महीना नहीं, बल्कि इस्लामी इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों का एक जीवंत प्रतीक है। यहीं से हिजरत की यादें शुरू होती हैं, इसी में अशूरा का दिन आता है, और इसी महीने में करबला की वह दर्दनाक घटना हुई जिसने इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।

यहाँ हम इस पूरे विषय को विस्तार से समझेंगे, जिसमें मुहर्रम की तریख़ें, इसकी फज़ीलतें, उपासना, रोज़े, अशूरा, करबला का इतिहास, और मुसलमान इस महीने में क्या-क्या करते हैं-सब कुछ विस्तार से शामिल है।

What is Muharram? – मुहर्रम क्या है?

मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है, और इसी के साथ हिजरी नए वर्ष की शुरुआत होती है। इसे चार पवित्र महीनों में शामिल किया गया है जिन्हें अल्लाह ने कुरआन में “हराम महीनों” के रूप में ज़िक्र किया है। “मुहर्रम” शब्द का अर्थ है ‘प्रतिबंधित’ यानी इस महीने में लड़ाई-झगड़ा, युद्ध और हिंसा जैसी गतिविधियाँ सख़्ती से मना थीं।

इस महीने की विशेषताएँ

  • यह उन चार महीनों में से है जिन्हें अल्लाह ने विशेष रूप से “पवित्र” बताया।
  • इसमें नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
  • बुरे कामों का बोझ भी अधिक गंभीर माना जाता है।
  • पैग़म्बर मुहम्मद-ने इसे “अल्लाह का महीना” कहा।
  • अशूरा (10 मुहर्रम) इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन है।

इसलिए जब हम पूछते हैं-What is Muharram?-तो इसका सरल उत्तर है: मुहर्रम एक ऐसा पवित्र महीना है जिसमें इतिहास, इबादत और भावनाएँ तीनों एक जगह मिलती हैं।

मुहर्रम 2025 कब से शुरू होगा?

इस्लामी कैलेंडर चाँद पर आधारित है, इसलिए महीनों की शुरुआत चाँद दिखाई देने पर निर्भर करती है।

मुहर्रम 2026 की संभावित तारीख:


(तारीख़ चांद देखे जाने पर आगे-पीछे हो सकती है)

इस दिन से नया हिजरी वर्ष भी शुरू होगा।

मुहर्रम के मुख्य दिन

मुहर्रम में कई ऐसे दिन हैं जिनका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। आइए उन्हें विस्तार से समझें।

1 मुहर्रम-इस्लामी नए वर्ष की शुरुआत

इस दिन कोई विशेष इबादत अनिवार्य नहीं है, लेकिन मुसलमान इस दिन

  • नए वर्ष पर आत्म-विश्लेषण करते हैं,
  • पुरानी गलतियों से तौबा करते हैं,
  • पैग़म्बर की हिजरत की याद करते हैं,
  • दुआ, सदक़ा और नफ़्ल इबादत करते हैं,
  • मस्जिद में जाकर अमन और बरकत की दुआ करते हैं।

दुनिया के कई देशों में मुस्लिम समुदाय इस दिन को आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानते हुए शांति, चिंतन और दुआओं के रूप में मनाता है।

10 मुहर्रम-यौमे अशूरा

अशूरा का दिन मुहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन अनेक ऐतिहासिक घटनाओं से भरा हुआ है।

अशूरा का धार्मिक महत्व

  • इसी दिन करबला की घटना में इमाम हुसैन (अ.स.) शहीद हुए।
  • इसी दिन अल्लाह ने मूसा (अ.स.) और इस्राईल की कौम को फ़िरऔन से नجات दी।
  • इस दिन रोज़ा रखने की अत्यधिक फज़ीलत बताई गई है।

हदीस के अनुसार, पैग़म्बर-ने कहा कि अशूरा का रोज़ा पिछले वर्ष के गुनाहों को मिटा देता है।

अशूरा के आस-पास के रोज़े

  • 9 मुहर्रम का रोज़ा — अत्यधिक अनुशंसित
  • 10 मुहर्रम का रोज़ा — सबसे अधिक फज़ीलत वाला
  • 11 मुहर्रम को भी रोज़ा रखा जा सकता है अगर कोई 9 तारीख़ का रोज़ा न रख पाए

Why is Muharram commemorated?-मुहर्रम को याद क्यों किया जाता है?

मुहर्रम को कई कारणों से याद किया जाता है:

1. यह अल्लाह द्वारा पवित्र घोषित महीना है।

कुरआन में साफ़ शब्दों में कहा गया है कि अल्लाह ने चार महीनों को “पवित्र” बनाया, और उनमें से एक मुहर्रम है।

2. इसे “अल्लाह का महीना” कहा गया।

हदीस में पैग़म्बर-ने मुहर्रम को “शहरुल्लाह” (अल्लाह का महीना) कहा।

3. इस महीने में दीन का सबसे दर्दनाक अध्याय “करबला” घटा।

यह दिन हक़ और न्याय की लड़ाई का प्रतीक है।

4. इसी महीने में हिजरत का ऐतिहासिक सफर याद किया जाता है।

622 CE में पैग़म्बर मुहम्मद-ने मक्का से मदीना की ओर हिजरत की, जिसके आधार पर हिजरी कैलेंडर शुरू होता है।

मुहर्रम का ऐतिहासिक महत्व

हिजरत-इस्लाम के इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़

पैग़म्बर-और उनके साथी मक्का में अत्याचारों से परेशान थे। उन्हें अपने धर्म का प्रचार और पालन करने में कठिनाईयाँ हो रही थीं। इसी कारण वे मदीना की ओर हिजरत कर गए। यह घटना इस्लामी इतिहास का वह मोड़ थी जहाँ से इस्लाम को स्थिरता, स्वतंत्रता और विकास मिला।

इसी घटना की याद में इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत भी हिजरत से की गई।

करबला की घटना-इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत

61 हिजरी में, 10 मुहर्रम को करबला में इमाम हुसैन (अ.स.) और पैग़म्बर-के परिवार के कई सदस्यों की शहादत हुई। यह घटना मुस्लिम इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है।

यज़ीद की सेना और इमाम हुसैन (अ.स.) का छोटा सा काफ़िला-संख्या में बेहद कम होने के बावजूद-हक़ और न्याय की रक्षा के लिए खड़ा रहा। करबला की यह लड़ाई सिर्फ़ एक युद्ध नहीं, बल्कि सत्य और असत्य के बीच संघर्ष का प्रतीक है।

आज भी दुनिया भर के मुसलमान इस घटना को गहरी भावनाओं में याद करते हैं।

मुहर्रम में मुसलमान क्या करते हैं?

मुहर्रम इबादत का महीना है। दुनिया भर के मुसलमान नीचे दिए गए कार्यों के माध्यम से इस महीने को बिताते हैं:

1. नफ़्ल रोज़े रखना

9, 10 और 11 मुहर्रम का रोज़ा विशेष फज़ीलत रखता है।

2. कुरआन की तिलावत

जो लोग रोज़ा न रख सकें, वे कुरआन पढ़कर, दुआ और ज़िक्र करके बरकत पा सकते हैं।

3. सदक़ा देना

साल की शुरुआत में सदक़ा देना पूरे वर्ष के लिए शुभ माना जाता है।

4. दुआ और इस्तिग़फ़ार

नई शुरुआत के साथ तौबा और नेकी की नीयत की जाती है।

5. करबला की याद

कई जगह पर मुसलमान करबला की घटना को याद करते हुए मजलिस, दुआ और इस्लामी इतिहास के अध्ययन का आयोजन करते हैं।

6. आत्म-विश्लेषण

हिजरी वर्ष की शुरुआत होने के कारण लोग अपनी पिछली गलतियों पर विचार करते हैं, और आने वाले वर्ष के लिए नेक इरादे बनाते हैं।

9 मुहर्रम को क्या होता है?

9 तारीख़ का रोज़ा सुन्नत और अनुशंसित है। एक प्रसिद्ध हदीस में वर्णन है:

जब पैग़म्बर-ने 10 मुहर्रम का रोज़ा रखा, तो उन्होंने कहा कि अगले वर्ष वे 9 तारीख़ का रोज़ा भी रखेंगे ताकि यहूदियों और ईसाइयों की परंपरा से अलग पहचान बन सके।
लेकिन अगला वर्ष आने से पहले ही पैग़म्बर-का इंतिक़ाल हो गया था।

इसलिए आज मुसलमान 9 और 10 मुहर्रम दोनों का रोज़ा रखने की कोशिश करते हैं।

मुहर्रम के कर्म और उनके लाभ

मुहर्रम में किए गए नेक कार्यों का सवाब बढ़ जाता है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण कार्य सूचीबद्ध हैं:

1. रोज़े

रोज़े गुनाहों की माफी और आत्मिक शांति का साधन हैं।

2. नफ़्ल नमाज़

विशेष रूप से रात की नमाज़ (तहज्जुद) अत्यधिक फज़ीलत रखती है।

3. कुरआन की तिलावत

कुरआन पढ़ना आध्यात्मिक ताक़त और मार्गदर्शन प्रदान करता है।

4. सदक़ा और दान

मुहर्रम से दान देने की आदत डालने वाला व्यक्ति पूरे वर्ष नेकी में आगे रहता है।

5. दुआ और ज़िक्र

हिजरी वर्ष की शुरुआत दुआ और तौबा से करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मुहर्रम का व्यापक प्रभाव-एक वैश्विक दृष्टिकोण

दुनिया के विभिन्न देशों में मुहर्रम अलग-अलग तरीकों से याद किया जाता है:

  • भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, लेबनान, बहरीन-करबला की याद में मजलिस, मातम और जुलूस
  • सऊदी अरब, UAE, कुवैत-दुआ, रोज़े और शांतिपूर्ण इबादत
  • अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में मुस्लिम समुदाय-मस्जिदों में विशेष शिक्षण कार्यक्रम, दुआ और सदक़ा

भाषाएँ और संस्कृतियाँ भले बदल जाएँ, लेकिन मुहर्रम की मूल भावना-आत्मिकता, धैर्य, न्याय और करुणा-एक ही रहती है।

यह भी पढ़े: muharram kab hai: इस्लामिक नए वर्ष और मुहर्रम की तारीख जानने का पूरा विवरण

निष्कर्ष: What is Muharram?

मुहर्रम वह महीना है जो हमें याद दिलाता है

  • नई शुरुआत का महत्व
  • हिजरत का ऐतिहासिक सबक
  • करबला के संघर्ष की नैतिकता
  • सत्य और न्याय के लिए बलिदान
  • और इस बात का एहसास कि नेकी और इबादत हर परिस्थिति में सर्वोपरि है

What is Muharram?
मुहर्रम एक पवित्र महीना है जहाँ आध्यात्मिकता, इतिहास, भावनाएँ और नेकी एक साथ मिलती हैं। यह हमें अतीत से सीखने, वर्तमान को सुधारने और भविष्य की ओर उम्मीद के साथ बढ़ने की प्रेरणा देता है।