Surat News: सूरत शहर के व्यस्त और भीड़भाड़ वाले लिंबायत इलाके में एक सतर्क नागरिक की समझदारी ने न सिर्फ एक व्यक्ति को रंगे हाथों पकड़वाया, बल्कि पश्चिम बंगाल से सूरत तक फैले एक बड़े अंतरराज्यीय फेक करंसी रैकेट का भी पर्दाफाश कर दिया। इस कार्रवाई में पुलिस ने 500 रुपये के मूल्यवर्ग की कुल 769 नकली नोटें बरामद की हैं, जिनकी कुल कीमत 3.82 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। यह मामला Surat News में इसलिए अहम है क्योंकि यह सीधे शहर की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
एक कॉल से खुला बड़ा फर्जीवाड़ा
पूरी घटना की शुरुआत एक सामान्य लेकिन बेहद अहम फोन कॉल से हुई। लिंबायत मार्केट में उस समय खरीदारी अपने चरम पर थी। इसी दौरान अनिल बंसीलाल चौधरी नामक एक जागरूक नागरिक की नजर एक व्यक्ति पर पड़ी, जो लगातार 500 रुपये के नोट चलाने की कोशिश कर रहा था। नोट के कागज और छपाई की गुणवत्ता देखकर अनिल को संदेह हुआ। उन्होंने बिना देरी किए इमरजेंसी सेवा जनरक्षक-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और संदिग्ध व्यक्ति सफीकुल इस्लाम नसीउद्दीन शेख की तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके पास से 500 रुपये की पांच नकली नोटें मिलीं, जिनके सीरियल नंबर भी संदिग्ध थे। यहीं से इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
भेस्तान में छापा, बड़ी खेप बरामद
पुलिस द्वारा की गई सख्त पूछताछ में सफीकुल ने कबूल किया कि वह अकेला नहीं है और यह नेटवर्क सूरत के भेस्तान इलाके तक फैला हुआ है। इसके बाद पुलिस ने तुरंत भेस्तान के साहिलनगर क्षेत्र में स्थित प्लॉट नंबर-38 पर छापा मारा। वहां एक कमरे से 500 रुपये के मूल्यवर्ग की 763 और नकली नोटें बरामद की गईं।
इस तरह कुल मिलाकर पुलिस ने 769 नकली नोटें जब्त कीं, जिनकी अनुमानित कीमत 3,84,500 रुपये है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है—सफीकुल इस्लाम नसीउद्दीन शेख (32 वर्ष), मोहम्मद राकिब नजीमुद्दीन शेख (32 वर्ष) और ताजमहल उर्फ मिलन जयमत मंडल (42 वर्ष)। तीनों वर्तमान में सूरत के भेस्तान इलाके में रह रहे थे, जबकि उनका मूल निवास पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का है।
एक ही सीरियल नंबर, बड़ी साजिश का संकेत
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया कि जब्त की गई नोटों के कई बंडलों में सभी नोटों पर एक ही सीरियल नंबर छपा हुआ था। आमतौर पर नकली नोट बनाने वाले भी अलग-अलग नंबर छापने की कोशिश करते हैं ताकि पकड़ में न आएं, लेकिन यहां इतनी बड़ी मात्रा में एक जैसे सीरियल नंबर वाली नोटें यह संकेत देती हैं कि बाजार में भारी मात्रा में नकली करेंसी खपाने की साजिश रची गई थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से जुड़े हैं, जो बांग्लादेश सीमा के काफी करीब है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नकली नोटों की छपाई बांग्लादेश में हुई हो और फिर इन्हें पश्चिम बंगाल के रास्ते सूरत लाया गया हो। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी बहारामपुर से करीब पांच लाख रुपये की नकली करेंसी लेकर सूरत पहुंचे थे।
छोटे सौदे, बड़ा मुनाफा
आरोपियों का तरीका बेहद शातिराना था। वे भीड़भाड़ वाले बाजारों, सब्जी मंडियों, पान की दुकानों और छोटे व्यापारियों को अपना निशाना बनाते थे। उनका तरीका यह था कि वे 500 रुपये की नकली नोट देकर सिर्फ 50 या 100 रुपये की छोटी खरीदारी करते थे। बदले में दुकानदार से 400 रुपये के असली नोट ले लेते थे।
इस तरह धीरे-धीरे नकली नोट बाजार में खप जाती थीं और आरोपी असली नकदी इकट्ठा कर लेते थे। छोटे दुकानदार अक्सर भीड़ और जल्दबाजी में नोटों की गहन जांच नहीं कर पाते, जिसका फायदा यह गिरोह उठा रहा था।
पुराना अपराधी निकला मुख्य आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि मुख्य आरोपी सफीकुल इस्लाम कोई नया अपराधी नहीं है। उसके खिलाफ पहले भी नकली नोटों से जुड़े मामलों में केस दर्ज हो चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद भी उसने इस अवैध कारोबार को दोबारा शुरू कर दिया, जो यह दर्शाता है कि यह एक संगठित और सुनियोजित सिंडिकेट है।
नागरिकों के लिए यह लाल बत्ती समान किस्सा है
यह मामला Surat News के जरिए शहरवासियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जब्त की गई नकली नोटों में वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड और कागज की गुणवत्ता में साफ खामियां पाई गई हैं। पुलिस ने आम नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे 500 रुपये की नोट स्वीकार करते समय विशेष सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश के लिए गहन जांच शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस फेक करंसी रैकेट से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।













