India coffee sector brews global success: भारत की कॉफी परंपरा, जो सैकड़ों वर्षों पुरानी है, आज एक नए स्वर्णिम दौर से गुजर रही है। बदलते वैश्विक बाज़ार, बढ़ती उत्पादन क्षमता, नीतिगत सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मांग में तेज़ उछाल ने भारत को दुनिया के प्रमुख कॉफी निर्यातकों में शामिल कर दिया है। India coffee sector brews global success—यह वाक्य अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत की कॉफी इंडस्ट्री की वास्तविक उपलब्धि है।
कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के अनुसार भारत में उगने वाली कॉफी अपनी छाया-आधारित खेती, विविध जलवायु क्षेत्रों और टिकाऊ प्रथाओं के कारण अब दुनिया भर में एक प्रीमियम कमोडिटी के रूप में तेजी से पहचान बना रही है।
भारत में कॉफी का आरंभ: बाबा बुदान से शुरू हुई कहानी
भारत की कॉफी यात्रा 17वीं शताब्दी में शुरू हुई, जब सूफी संत बाबा बुदान यमन से सात कॉफी बीज लाए और इन्हें कर्नाटक के बाबा बुदान गिरी पर्वतों में रोपा। इन सात बीजों से उपजा पौधा आगे चलकर एक व्यापक कॉफी संस्कृति और बड़े कृषि क्षेत्र की नींव बना।
शुरुआत में यह एक बगीचे की फसल के रूप में उगाई जाती थी, लेकिन 18वीं सदी में धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर कॉफी उत्पादन का विस्तार होने लगा और भारत एक महत्वपूर्ण कॉफी उत्पादक देश के रूप में उभरा।
आज भारत के पश्चिमी एवं पूर्वी घाट और उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 4.91 लाख हेक्टेयर भूमि पर कॉफी की खेती होती है। यह क्षेत्र दो मिलियन से अधिक लोगों की आजीविका का आधार है, जिनमें से 99 प्रतिशत छोटे किसान हैं।
देश के प्रमुख कॉफी क्षेत्र और उनकी विशेषताएँ
भारत की भौगोलिक विविधता ने कॉफी को अलग-अलग स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता प्रदान की है। देश को 13 आधिकारिक कॉफी ज़ोन्स में बाँटा गया है। इनमें सबसे प्रसिद्ध हैं:
- कूर्ग (कर्नाटक)
- चिकमंगलूर
- बाबाबुदानगिरी
- वायनाड (केरल)
- नीलगिरि (तमिलनाडु)
- अराकू घाटी (आंध्र प्रदेश)
कर्नाटक भारत का कॉफी हब माना जाता है, जो सालाना 2.8 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन करता है। इसके बाद केरल और तमिलनाडु का स्थान आता है।
भारत में कॉफी की खेती छाया वाली दो-स्तरीय प्रणाली के तहत होती है, जो न केवल कॉफी की गुणवत्ता बढ़ाती है, बल्कि वन्य जैव-विविधता को भी सुरक्षित रखती है।
भारत के जीआई-टैग्ड कॉफी ब्रांड: वैश्विक पहचान और प्रतिष्ठा
भारत ने कॉफी के सात प्रसिद्ध प्रकारों के लिए भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त किए हैं। इनमें शामिल हैं:
- कूर्ग अरेबिका
- वायनाड रोबस्टा
- अराकू वैली अरेबिका
- बाबाबुदानगिरी अरेबिका
- मॉन्सूनड मालाबार
- चिकमंगलूर अरेबिका
- नीलगिरि रोबस्टा
इनमें से मॉन्सूनड मालाबार अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अत्यधिक लोकप्रिय है, जिसकी वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है।
इसके अलावा, मैसूर नगेट्स एक्स्ट्रा बोल्ड और रोबस्टा कापी रॉयल जैसी प्रीमियम किस्में भी भारत की वैश्विक पहचान मजबूत कर रही हैं।
कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया: क्षेत्र के विकास की रीढ़
1942 में बने कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया ने अनुसंधान, गुणवत्ता बढ़ाने, किसान सहायता और निर्यात बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:
- सेंट्रल कॉफी रिसर्च इंस्टिट्यूट में आधुनिक शोध
- इंटीग्रेटेड कॉफी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट
- वैश्विक बाज़ार में भारतीय कॉफी का प्रचार
- फाइन कप अवॉर्ड्स जैसी प्रतियोगिताएँ
- देश में कॉफी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इंडिया कॉफी हाउस नेटवर्क
भारत बना दुनिया का 5वां सबसे बड़ा कॉफी निर्यातक
भारतीय कॉफी की मांग विदेशी बाज़ारों में लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का कॉफी निर्यात 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है।
सिर्फ अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच ही भारत ने 1.07 बिलियन डॉलर का निर्यात किया।
भारत की कुल वार्षिक कॉफी का लगभग 70 प्रतिशत भाग 128 देशों को भेजा जाता है।
प्रमुख निर्यात गंतव्य:
- इटली
- जर्मनी
- बेल्जियम
- रूस
- यूएई
- स्विट्जरलैंड
भारतीय रोबस्टा अंतरराष्ट्रीय इंस्टेंट कॉफी उद्योग की रीढ़ बन चुका है, जबकि अरेबिका की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
नीतिगत सुधारों से मिली बड़ी मजबूती
सरकार की नीतियों ने कॉफी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और बढ़ाया है।
- इंस्टेंट कॉफी पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया
- घरेलू बाज़ार में कीमतें घटेंगी
- खपत बढ़ेगी
- प्रोसेसिंग यूनिट्स को लाभ मिलेगा
- भारत–यूके CETA और भारत–EFTA TEPA जैसे व्यापार समझौतों से
- भारतीय रोस्टेड और इंस्टेंट कॉफी को प्रीमियम बाज़ारों में ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिला है।
यह कदम भारत की कॉफी ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर और भी प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।
कोरापुट कॉफी: जनजातीय क्षेत्रों में सफलता की नई मिसाल
ओडिशा के कोरापुट जिले की कॉफी ने हाल के वर्षों में देश और विदेश दोनों जगह बड़ी पहचान बनाई है।
TDCCOL की सहायता से इस क्षेत्र के जनजातीय किसानों ने:
- फाइन कप अवॉर्ड्स में स्थान बनाया
- कोरापुट कॉफी ब्रांड के रूप में बाज़ार में अपनी पकड़ मजबूत की
- कैफे और पैक्ड उत्पादों के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान हासिल की
यह कहानी दिखाती है कि India coffee sector brews global success केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम है।
2047 का लक्ष्य: सालाना 9 लाख टन कॉफी उत्पादन
कॉफी बोर्ड ने भारत की कॉफी उत्पादन क्षमता को 2047 तक 9 लाख टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य इन कारकों से संभव होगा:
- गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में कॉफी का विस्तार
- जलवायु-रोधी किस्मों का विकास
- आधुनिक खेती और तकनीक
- घरेलू कैफे संस्कृति का तेज़ी से बढ़ना
भारत का कॉफी बाज़ार 2028 तक 8.9% CAGR की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि कैफे उद्योग 15–20% प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ता भारत
बाबा बुदान के सात बीजों से शुरू हुई यात्रा अब वैश्विक मंच पर एक नई पहचान बना चुकी है। भारतीय कॉफी अपनी गुणवत्ता, स्थिरता, अनोखे स्वाद और छोटे किसानों की मेहनत के कारण दुनिया भर में पसंद की जा रही है।
आज यूरोप, मध्य-पूर्व, रूस और एशिया के प्रीमियम कैफे भारतीय कॉफी को विशेष महत्व देते हैं।
सचमुच, India coffee sector brews global success—यह कहानी भारत की दृढ़ता, नवाचार, और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की कहानी है।













