Anil Kumble: तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करने की दिशा में बेंगलुरु ने एक अहम कदम उठाया है। भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान और कर्नाटक के Forest & Wildlife Ambassador Anil Kumble ने हाल ही में शहर में एक विशेष मोबाइल वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल शहरी क्षेत्रों में घायल, विस्थापित और संकट में फंसे वन्यजीवों को त्वरित और मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
यह अत्याधुनिक वन्यजीव एम्बुलेंस AI-नेटिव ऑटोमोटिव प्लेटफॉर्म कंपनी Tekion और बेंगलुरु स्थित Praana Animal Foundation के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है। इस पहल का मकसद शहर के तेजी से फैलते दायरे में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष के मामलों से प्रभावी ढंग से निपटना और रेस्क्यू सिस्टम को और मजबूत बनाना है।
शहरी विकास से बढ़ती वन्यजीव चुनौतियां
बेंगलुरु जैसे महानगरों में शहरी विस्तार के कारण जंगलों और प्राकृतिक गलियारों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। नए आवासीय प्रोजेक्ट, सड़कें और व्यावसायिक ढांचे वन्यजीवों के पारंपरिक रास्तों को बाधित कर रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि अब सांप, बंदर, घायल पक्षी और छोटे स्तनधारी अक्सर रिहायशी इलाकों में देखे जा रहे हैं।
शहर के बाहरी इलाकों में कभी-कभी तेंदुए, गौर और स्लॉथ भालू जैसे बड़े वन्यजीवों के भटककर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने की घटनाएं भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों में त्वरित, सुरक्षित और विशेषज्ञ हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, ताकि इंसानों और जानवरों दोनों को नुकसान से बचाया जा सके।
विशेष रूप से डिजाइन की गई वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस
नई मोबाइल वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस को खासतौर पर शहरी और अर्ध-शहरी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह एम्बुलेंस विभिन्न प्रकार के रेस्क्यू ऑपरेशनों में सक्षम है, जिनमें प्रवासी पक्षी, सरीसृप (विशेष रूप से सांप), बंदर और छोटे स्तनधारी शामिल हैं।
एम्बुलेंस में जरूरी मेडिकल उपकरण, रेस्क्यू टूल्स और सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था मौजूद है। इसके साथ ही एक प्रशिक्षित पैरा-वेटरनरी स्टाफ हर समय वाहन में मौजूद रहेगा, जो मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर जानवर को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद करेगा।
बड़े और खतरनाक वन्यजीवों के लिए भी तैयार
यह एम्बुलेंस केवल छोटे जानवरों तक सीमित नहीं है। इसे कर्नाटक वन विभाग की मदद के लिए भी डिजाइन किया गया है, खासकर उन हाई-रिस्क परिस्थितियों में जब बड़े वन्यजीव जैसे तेंदुआ, गौर या स्लॉथ भालू रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं।
इन जानवरों को सुरक्षित रूप से पकड़ना, ट्रांसपोर्ट करना और बिना तनाव के उपयुक्त स्थान तक ले जाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। नई एम्बुलेंस इस प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
रेस्क्यू के बाद पुनर्वास की पूरी व्यवस्था
रेस्क्यू किए गए जानवरों को अस्थायी समाधान के तहत कहीं छोड़ने के बजाय, उन्हें विशेषज्ञ देखभाल के लिए अधिकृत केंद्रों में भेजा जाएगा। एम्बुलेंस के माध्यम से बचाए गए वन्यजीवों को Bannerghatta Biological Park या Birds of Paradise Rehabilitation Centre ले जाया जाएगा, जहां उन्हें पेशेवर उपचार, देखभाल और पुनर्वास की सुविधा मिलेगी।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल जान बचाना नहीं, बल्कि उन्हें स्वस्थ कर उनके प्राकृतिक वातावरण में लौटाने की संभावनाएं भी बढ़ाना है। यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने वाले वन्यजीव संरक्षण मानकों के अनुरूप है।
Anil Kumble का संदेश और भूमिका
इस पहल के शुभारंभ पर Anil Kumble ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए संगठित और संवेदनशील प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि तेजी से विकसित होते शहरों में इंसानों और जानवरों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
कर्नाटक के Forest & Wildlife Ambassador के रूप में Anil Kumble पहले भी कई संरक्षण अभियानों से जुड़े रहे हैं। इस मोबाइल वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर उन्होंने न केवल इस पहल को समर्थन दिया, बल्कि आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दिया।
Praana Animal Foundation की सोच
Praana Animal Foundation की संस्थापक Samyukta Hornad ने कहा कि बेंगलुरु जैसे शहर में वन्यजीव आपात स्थितियों से निपटने के लिए यह एम्बुलेंस एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, शहर में जैव विविधता बहुत समृद्ध है, लेकिन अनियंत्रित विकास के कारण कई जानवर घायल, विस्थापित या शोषण का शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस सेवा के तहत एक 24×7 हेल्पलाइन भी शुरू की गई है, ताकि नागरिक किसी भी वन्यजीव आपात स्थिति की तुरंत सूचना दे सकें। यह एम्बुलेंस शहर की सीमाओं और बाहरी इलाकों में वन विभाग के साथ मिलकर काम करेगी।
विदेशी और अवैध रूप से पाले गए जानवरों के लिए भी सुविधा
इस एम्बुलेंस की एक और खासियत यह है कि यह केवल देशी वन्यजीवों तक सीमित नहीं है। अवैध ब्रीडिंग सेंटर्स से पकड़े गए शुतुरमुर्ग, इमू और अन्य विदेशी पक्षियों को भी सुरक्षित रूप से संबंधित पुनर्वास केंद्रों तक ले जाने की सुविधा इसमें मौजूद है।
यह कदम वन्यजीव संरक्षण कानूनों के पालन और जानवरों के कल्याण को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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Tekion की CSR पहल ‘Tekion for Good’
यह परियोजना Tekion की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पहल ‘Tekion for Good’ के तहत शुरू की गई है। Tekion के Senior Director Aravind Gowda ने कहा कि कंपनी का मानना है कि कॉर्पोरेट जिम्मेदारी केवल नीतियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक असर ज़मीन पर दिखना चाहिए।
उनके अनुसार, यह साझेदारी इस बात का उदाहरण है कि किस तरह कॉर्पोरेट सेक्टर, सामाजिक संस्थाएं और सरकार मिलकर पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठा सकते हैं।
सरकारी समर्थन और भविष्य की दिशा
इस कार्यक्रम में कर्नाटक सरकार के Department of Ecology & Environment के Principal Secretary Srinivasulu भी मौजूद थे। उन्होंने Praana Animal Foundation और Tekion के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल राज्य की वन्यजीव रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रेस्क्यू और सही पुनर्वास न केवल जानवरों की जान बचाता है, बल्कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को भी कम करता है।
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सह-अस्तित्व की ओर एक मजबूत कदम
बेंगलुरु में मोबाइल वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस की शुरुआत यह दर्शाती है कि आधुनिक शहरी विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। Anil Kumble जैसे सार्वजनिक व्यक्तित्व का समर्थन इस पहल को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
शहर के नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी वन्यजीव के संकट में होने की जानकारी मिले, तो वे Praana Animal Foundation की 24×7 हेल्पलाइन +91 91088 19998 पर संपर्क करें, ताकि जानवरों को पेशेवर और मानवीय सहायता मिल सके।
यह पहल आने वाले समय में बेंगलुरु को शहरी वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।













