Jamnagar में विदेशी पक्षियों का आगमन: हजारों मील की उड़ान भरकर सर्दियां बिताने पहुंचे प्रवासी मेहमान, रणमल झील में मल्लार्ड सहित कई प्रजातियां दिखीं

🗓️ Published on: December 13, 2025 11:03 pm
Jamnagar

गुजरात के Jamnagar शहर में एक बार फिर सर्दियों की दस्तक के साथ ही विदेशी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। हर साल की तरह इस वर्ष भी हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी हजारों मील की लंबी यात्रा तय कर ठंड के मौसम में Jamnagar पहुंचे हैं। यही वजह है कि Jamnagar को देश-विदेश के पक्षी विशेषज्ञ और प्रकृति प्रेमी “विदेशी पक्षियों की शीतकालीन राजधानी” भी कहते हैं।

जैसे-जैसे तापमान में गिरावट आ रही है, वैसे-वैसे Jamnagar के विभिन्न जलाशयों और आर्द्रभूमि क्षेत्रों में पक्षियों की चहचहाहट बढ़ती जा रही है। खास तौर पर खिजड़िया पक्षी अभयारण्य और शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक रणमल झील इन प्रवासी पक्षियों के पसंदीदा ठिकानों में शामिल हैं। यहां यूरोप, साइबेरिया, मध्य एशिया और उत्तरी एशिया से आने वाली कई दुर्लभ प्रजातियां देखी जा रही हैं।

रणमल झील में मल्लार्ड बना आकर्षण का केंद्र

इस वर्ष Jamnagar की रणमल झील में ‘मल्लार्ड’ नामक विदेशी पक्षी की मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों का खास ध्यान खींचा है। मल्लार्ड एक बतख जैसी दिखने वाली प्रजाति है, जिसकी पहचान उसका चमकदार हरा सिर, पीली चोंच और खूबसूरत रंगों वाला शरीर है। यह पक्षी न केवल देखने में आकर्षक होता है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र में भी इसकी अहम भूमिका मानी जाती है।

मल्लार्ड की मौजूदगी की खबर फैलते ही Jamnagar और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग रणमल झील पहुंच रहे हैं। सुबह और शाम के समय झील के किनारे कैमरों और दूरबीनों के साथ पक्षी प्रेमियों की भीड़ देखी जा सकती है। कई फोटोग्राफर और शोधकर्ता भी इन विदेशी मेहमानों की गतिविधियों का दस्तावेजीकरण कर रहे हैं।

Jamnagar का पर्यावरण और पक्षियों का रिश्ता

विशेषज्ञों के अनुसार Jamnagar का भौगोलिक स्थान, जलवायु और यहां उपलब्ध जलस्रोत प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल हैं। खिजड़िया पक्षी अभयारण्य को तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है, जहां हर साल सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी रिकॉर्ड किए जाते हैं। रणमल झील जैसे शहरी जलाशय भी इन पक्षियों को भोजन और सुरक्षित विश्राम स्थल प्रदान करते हैं।

विदेशी पक्षी आमतौर पर अक्टूबर से मार्च के बीच Jamnagar में प्रवास करते हैं। इस दौरान वे यहां भोजन करते हैं, ऊर्जा संचित करते हैं और फिर गर्मियों के आगमन से पहले अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं। इस प्राकृतिक चक्र से Jamnagar की जैव विविधता और पर्यटन दोनों को लाभ मिलता है।

पक्षियों को गलत भोजन बना रहा खतरा

हालांकि, जहां एक ओर विदेशी पक्षियों का आगमन खुशी और उत्साह का कारण है, वहीं दूसरी ओर एक गंभीर चिंता भी सामने आ रही है। कई नागरिक पक्षियों को दाना डालने के नाम पर चना, नमकीन और गाठिया जैसे तले-भुने खाद्य पदार्थ खिला रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह भोजन पक्षियों के पाचन तंत्र के लिए बेहद हानिकारक होता है।

पिछले वर्ष Jamnagar में खोराकी विषाक्तता के कारण कई विदेशी पक्षियों की मौत की घटनाएं सामने आई थीं। जांच में यह सामने आया था कि मानव द्वारा दिए गए अस्वास्थ्यकर भोजन के कारण पक्षियों की सेहत बिगड़ी। इसी कारण वन विभाग, पक्षी प्रेमी संगठनों और पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा बार-बार लोगों से अपील की जा रही है कि वे पक्षियों को गाठिया या अन्य प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ न खिलाएं।

यह भी पढ़े: Saurashtra Tourist Place: सौराष्ट्र के ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक चमत्कारों की सम्पूर्ण यात्रा

जागरूकता की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग वास्तव में पक्षियों की मदद करना चाहते हैं, तो उन्हें प्राकृतिक भोजन व्यवस्था पर छोड़ना ही सबसे बेहतर विकल्प है। झीलों और आर्द्रभूमि क्षेत्रों में पक्षियों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होता है। मानव हस्तक्षेप कई बार अनजाने में नुकसान पहुंचा सकता है।

Jamnagar प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान चलाने की भी आवश्यकता बताई जा रही है, ताकि लोग विदेशी पक्षियों के संरक्षण के महत्व को समझें। यदि सही कदम उठाए जाएं, तो Jamnagar आने वाले वर्षों में भी प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाना बना रह सकता है।

विदेशी पक्षियों का यह वार्षिक आगमन न केवल Jamnagar की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।