Atkot Rape case news गुजरात : छह साल की मासूम से क्रूरता, पुलिस पर धारदार हथियार से हमला और आरोपी पर फायरिंग-तात्कालिक एक्शन से हिला गुजरात

🗓️ Published on: December 10, 2025 11:35 pm
Atkot Rape case news

राजकोट जिले के शांत माने जाने वाले आटकोट क्षेत्र में घटित एक दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना ने पूरे गुजरात को हिला दिया है। Atkot Rape case news के नाम से देशभर में चर्चा में आया यह मामला अपनी बर्बरता, मानवीय क्रूरता और बाद में हुई पुलिस कार्रवाई के कारण राष्ट्रीय-स्तर पर सुर्खियों में आ गया है। दिल्ली की निर्भया घटना की याद दिलाने वाली इस घटना ने आम जनता, पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार तक सभी को विचलित कर दिया है।

यह घटना कानपर गांव की सीमा से शुरू हुई, जहां एक खेतमजदूर परिवार की छह वर्षीय बच्ची के साथ ऐसी क्रूरता हुई जिसे शब्दों में बयान करना भी कठिन है। एक 30 वर्षीय व्यक्ति, जो खुद तीन बच्चों का पिता है, ने मासूम को झाड़ियों में खींचकर न सिर्फ शारीरिक हमला किया बल्कि उसके निजी अंगों में लोहे की रॉड डालकर उसे अधमरा छोड़ दिया।

जब यह घटना सामने आई, तब पुलिस ने तुरन्त जांच शुरू की, चारों तरफ से घेरा बनाया और कुछ ही घंटों में आरोपी को पकड़ लिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती-जांच के दौरान आरोपी ने पुलिस पर ही धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिसके बाद पुलिस को आत्मरक्षा में फायरिंग करनी पड़ी। आरोपी दोनों पैरों में घायल होकर अस्पताल पहुंचाया गया।

पूरी घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए बल्कि यह भी दिखाया कि अपराधी मानसिकता कैसे कभी-कभी अचानक फूट पड़ती है और समाज को हिला देती है। नीचे यह पूरी घटना क्रमवार और विस्तार से प्रस्तुत है।

घटना का प्रारंभ: खेत में खेल रही बच्ची पर नज़र पड़ी और विकृत मानसिकता जाग उठी

4 दिसंबर की दोपहर, कड़ी धूप के बीच कानपर गांव के खेतों में मजदूर परिवार अपना दैनिक काम कर रहे थे। छह वर्ष की मासूम बच्ची अन्य बच्चों के साथ खेत के पास बनी टंकी के आसपास खेल रही थी।

इसी दौरान आरोपी रामसिंग तजसिंग-जो मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का निवासी है और खेतों में काम करने के लिए गुजरात आया था-ने बच्ची को देखा। आरोपी ने बाद में पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने पहले कोई विशेष योजना नहीं बनाई थी। बच्ची को देखने के बाद उसके भीतर अचानक विकृत भावना जागी और उसने मौके का फायदा उठाने का सोचा।

उसने मासूम बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर पानी की टंकी के पीछे तब ले गया जब आसपास के वयस्क लोग काम में व्यस्त थे। बच्ची का मामा उसी समय कमरे में सो रहा था।

इसके बाद जो हुआ वह सिर्फ शारीरिक अत्याचार नहीं बल्कि अमानवीय क्रूरता थी। बच्ची पर पहले यौन हमला किया गया, और जब आरोपी अपनी मंशा में सफल नहीं हो पाया, तो उसने लोहे का सळिया (रॉड) लेकर घटनास्थल के पास पड़ी झाड़ियों में ही बच्ची के निजी अंगों में क्रूरता से डाल दिया, जिससे बच्ची दर्द से तड़प उठी। चोट इतनी गंभीर थी कि अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।

इसके बाद भी आरोपी ने कोई मदद करने की कोशिश नहीं की। वह बच्ची को वहीं खून से लथपथ छोड़कर फरार हो गया।

परिवार को चोट देख पहले भ्रम हुआ-फिर डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची यौन उत्पीड़न का शिकार हुई

शुरुआत में जैसे ही मामा-मामी को बच्ची के घायल होने का पता चला, उन्हें लगा कि शायद बच्ची खेलते-खेलते गिर गई होगी। जल्द ही उसे अस्पताल ले जाया गया। यहीं पर डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के साथ यौन शोषण हुआ है और उसके निजी अंगों में बाहरी वस्तु जबरन डाली गई है।

इसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर तुरंत पुलिस को सूचना देनी पड़ी। पुलिस ने 24 घंटे महिला कॉन्सटेबल को बच्ची के साथ रखा ताकि बच्ची सुरक्षित और मानसिक रूप से स्थिर महसूस कर सके। जब बच्ची थोड़ी संभली तो बाल काउंसलर, डॉक्टर और महिला पुलिस के सामने उसने आरोपी की पहचान कर दी।

जांच में पुलिस की तेजी: सीसीटीवी एनालिसिस से 10 संदिग्ध सामने आए, बच्ची ने आरोपी की पहचान की

राजकोट ग्रामीण एसपी विजयसिंह गुर्जर ने बताया कि पुलिस ने तुरंत 10 टीमों का गठन किया और आसपास के क्षेत्र के लगभग 10 किलोमीटर तक के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। इस प्रक्रिया में 10 संभावित संदिग्ध सामने आए।

इसके बाद बाल विशेषज्ञों और महिला सुरक्षा टीम की उपस्थिति में बच्ची को सभी संदिग्धों की पहचान करवाई गई, जिसके बाद उसने बिना किसी झिझक आरोपी रामसिंग की पहचान कर दी। इसी आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेशी और पांच दिन का रिमांड

पुलिस ने प्रारंभिक जांच पूरी करके आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने आगे की जांच के लिए 5 दिन का रिमांड मंजूर कर दिया। रिमांड के दौरान पुलिस को घटनास्थल की पुनर्संरचना (रिकंस्ट्रक्शन), साक्ष्यों की बरामदगी और पूरी जानकारी इकट्ठा करने की जरूरत थी।

इसलिए पुलिस आरोपी को लेकर उस खेत में पहुँची जहाँ लोहे की रॉड फेंकी गई थी और जहाँ घटना घटित हुई थी।

जांच के दौरान अचानक हमला-आरोपी ने पुलिस पर लोहा धारिया से हमला किया

जैसे ही पुलिस आरोपी को लेकर कानपर गांव की वाडी में पहुंची, वहाँ से घटनास्थल का नज़दीकी हिस्सा दिखाया जा रहा था। इसी दौरान मौका देखकर आरोपी ने अचानक पुलिस पर ही हमला कर दिया।

उसने अपने घर के पास से लोहा धारिया उठाया और LCB के कर्मचारी धर्मेश बावलिया पर वार कर दिया, जिससे उनके हाथ में गंभीर चोट आई। घटना के बाद कुछ सेकेंड के लिए स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई।

पुलिस को डर था कि आरोपी किसी और पर भी वार कर सकता है या भागने की कोशिश कर सकता है। उसकी मंशा बेहद आक्रामक और खतरनाक थी।

पुलिस को आत्मरक्षा में दो राउंड फायरिंग करनी पड़ी

आरोपी के हमले से स्थिति इतनी खतरनाक हो गई कि पुलिस अधिकारियों ने त्वरित निर्णय लेते हुए आत्मरक्षा में दो राउंड गोली चलानी पड़ी। गोली आरोपी के दोनों पैरों में लगी और वह वहीं गिर पड़ा।

इसके बाद पुलिस ने उसे तुरंत आटकोट की KD पी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया, जहाँ उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, आरोपी की स्थिति स्थिर है और उसे उठने-चलने में समय लगेगा, लेकिन खतरे से बाहर है।

कानून की धाराएँ: POCSO और अन्य गंभीर धाराएँ जोड़ी गईं, और भी जुड़ सकती हैं

पुलिस ने आरोपी पर POCSO एक्ट, गंभीर यौन अपराध की धाराएँ, हत्या के प्रयास की धारा, और पुलिस पर हमले की धाराएँ जोड़ी हैं।
एसपी ने यह भी कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जरूरत पड़ने पर और धाराएँ जोड़ी जाएँगी, ताकि दोषी को कड़ा से कड़ा दंड मिल सके।

राज्य के उपमुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक ने आदेश दिया है कि मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल हो और बच्ची को न्याय दिलाने में कोई देरी न हो।

आरोपी के परिवार का पृष्ठभूमि: 13 साल की बेटी का पिता

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपी रामसिंग खुद एक तीन बच्चों का पिता है-उसकी 13 साल की एक बेटी और दो छोटे बेटे हैं। पड़ोसियों के अनुसार वह सामान्य रूप से खेत में मजदूरी करता था और किसी ने कभी उसके आचरण पर संदेह नहीं किया।

लेकिन पुलिस पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने बच्ची को देखकर अचानक विकृत मानसिकता के चलते यह अमानवीय हरकत की।

स्थानीय समाज में गुस्सा, प्रशासन पर दबाव, बच्ची के लिए दुआएँ

घटना के बाद पूरे आटकोट क्षेत्र में गुस्से का माहौल है। लोग दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की माग कर रहे हैं।
कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे “Atkot Rape case news” नाम दिया है, क्योंकि घटना की बर्बरता दिल्ली के निर्भया कांड से मिलती-जुलती है।

गाँव और आसपास के इलाकों में भय, सदमे और आक्रोश की लहर है। लोग पुलिस की कार्रवाई की प्रशंसा तो कर रहे हैं, लेकिन आरोपी के अमानवीय कृत्य से गहरा दुख भी व्यक्त कर रहे हैं।

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बच्ची का मेडिकल उपचार जारी-स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर विशेष निगरानी

डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की हालत में सुधार हो रहा है लेकिन अभी उसे कई दिनों तक निगरानी में रखना होगा।
हर घंटे उसकी चिकित्सा जांच की जाती है और उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए काउंसलर और महिला सुरक्षा अधिकारी लगातार उसके साथ रहते हैं।

राज्य सरकार ने बच्ची के उपचार और परिवार की सुरक्षा के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं।

जाँच जारी, रिमांड में और खुलासे हो सकते हैं

पांच दिन के रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से हथियारों की बरामदगी, घटना की पुनर्निर्माण प्रक्रिया, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी अध्ययन करेगी।

संभावना है कि पुलिस और भी महत्वपूर्ण विवरण जुटाएगी, जो इस मामले को अदालत में मजबूत बनाएँगे।

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निष्कर्ष: Nirbhaya case of Atkot ने दिल दहला दिया-तेजी से न्याय की उम्मीद

Atkot Rape case news गुजरात के इतिहास में दर्ज होने वाला एक ऐसा मामला बन गया है जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है।
मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता, आरोपी की क्रूर मानसिकता और फिर पुलिस पर हुए हमले ने इस केस को और भी गंभीर बना दिया है।

हालाँकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तेज़ जांच, बच्ची की पहचान और आरोपी की समय रहते गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि कानून व्यवस्था ऐसे मामलों में बिल्कुल ढीली नहीं पड़ेगी।

समाज एक ही मांग कर रहा है-मासूम को न्याय मिले और दोषी को कठोर सज़ा दी जाए।