Pia bidders: Pakistan एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील आर्थिक फैसले की ओर बढ़ रहा है। देश की सरकारी एयरलाइन Pakistan International Airlines (PIA) को बेचने की प्रक्रिया अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। आज तीन बड़ी कंपनियां इस घाटे में चल रही एयरलाइन को खरीदने के लिए सीलबंद बोलियां जमा करेंगी। यह सौदा सिर्फ एक बिज़नेस डील नहीं है, बल्कि इसके पीछे Pakistan की बिगड़ती अर्थव्यवस्था, IMF loan, और Pakistan Army के बढ़ते कारोबारी प्रभाव जैसी गहरी वजहें जुड़ी हुई हैं।
Pia bidders की यह दौड़ उस समय हो रही है, जब Pakistan गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाली अगली किश्त इसी सौदे पर निर्भर करती है।
Pakistan क्यों बेच रहा है अपनी राष्ट्रीय एयरलाइन PIA?
Pakistan International Airlines कभी South Asia की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइनों में गिनी जाती थी। लेकिन पिछले करीब 20 वर्षों से यह एयरलाइन लगातार घाटे में चल रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, PIA पर इस समय लगभग 78 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये का कर्ज है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के बराबर बैठता है।
हर साल एयरलाइन को करीब 7,500 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह घाटा Pakistan की कमजोर अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बन चुका है।
Karachi Plane Crash ने बिगाड़ी PIA की साख
साल 2020 में हुए कराची विमान हादसे ने PIA की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी नुकसान पहुंचाया। इस दुर्घटना में 96 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में यह खुलासा हुआ कि PIA के 260 से ज्यादा पायलटों के लाइसेंस फर्जी या संदिग्ध थे।
इसके बाद यूरोपियन यूनियन, अमेरिका और ब्रिटेन ने PIA की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया। यूरोप और अमेरिका में यह प्रतिबंध अब तक जारी है। ये वही रूट थे, जहां से PIA को सबसे ज्यादा मुनाफा होता था। प्रतिबंध लगते ही एयरलाइन की आय बुरी तरह गिर गई।
खराब मैनेजमेंट और पुराना बेड़ा
PIA में जरूरत से ज्यादा कर्मचारी हैं, जिनके वेतन और सुविधाओं पर सरकार को हर साल भारी रकम खर्च करनी पड़ती है। इसके अलावा एयरलाइन के पास पुराने विमान हैं, जिनकी मेंटेनेंस लागत बहुत अधिक है। नई टेक्नोलॉजी और आधुनिक एयरक्राफ्ट खरीदने की स्थिति में PIA नहीं थी।
खराब मैनेजमेंट, राजनीतिक हस्तक्षेप और बढ़ते कर्ज ने PIA को लगभग दिवालिया स्थिति में पहुंचा दिया।
IMF की शर्तें: PIA की बिक्री क्यों जरूरी बनी?
साल 2023 में Pakistan लगभग आर्थिक दिवालियापन के कगार पर खड़ा था। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका था और देश को जरूरी आयात तक में दिक्कत आने लगी थी। ऐसे में Pakistan ने IMF से bailout package की मांग की।
IMF ने 7 अरब डॉलर (लगभग 63 हजार करोड़ रुपये) का loan मंजूर किया, लेकिन इसके बदले 64 सख्त शर्तें रखीं। इनमें सबसे अहम शर्त थी—घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों का निजीकरण, जिसमें PIA प्रमुख है।
IMF का मानना है कि PIA जैसी कंपनियां Pakistan की कमजोर अर्थव्यवस्था पर बोझ हैं और टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद कर रही हैं।
IMF की प्रमुख शर्तें क्या हैं?
IMF की शर्तों के तहत Pakistan को:
- सरकारी खर्च और आमदनी के बीच का अंतर कम करना होगा
- टैक्स कलेक्शन बढ़ाना होगा
- घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों का निजीकरण करना होगा
- सरकारी अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा
- सरकारी और निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार कम करना होगा
अब तक Pakistan को IMF से करीब 30 हजार करोड़ रुपये मिल चुके हैं। लेकिन अगली किश्त तभी मिलेगी, जब PIA की बिक्री की प्रक्रिया पूरी होगी।
Pia bidders कौन हैं? कौन खरीदना चाहता है PIA?
PIA को खरीदने के लिए तीन कंपनियां मैदान में उतरी हैं। ये Pia bidders आज सीलबंद लिफाफों में अपनी बोलियां जमा करेंगी।
1. Lucky Cement Limited
यह Pakistan की बड़ी इंडस्ट्रियल कंपनियों में से एक है, जिसका कारोबार सीमेंट, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में फैला है।
2. Arif Habib Corporation Limited
यह एक बड़ा निवेश समूह है, जिसकी मौजूदगी बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी सेक्टर में है।
3. Air Blue Private Limited
यह एक निजी एयरलाइन है और एविएशन सेक्टर में अनुभव रखने के कारण इसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
दोपहर बाद बोलियां खोली जाएंगी और सबसे ज्यादा कीमत लगाने वाली कंपनी को PIA सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी।
Pakistan Army की दिलचस्पी क्यों?
हालांकि Fauji Fertilizer Company ने आखिरी वक्त पर बोली से नाम वापस ले लिया, लेकिन Pakistan Army की भूमिका अब भी चर्चा में है। Fauji Fertilizer को सेना का समर्थन प्राप्त था और यह कंपनी Fauji Foundation से जुड़ी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Fauji Fertilizer अब सीधे बोली न लगाकर, बोली जीतने वाली कंपनी के साथ साझेदारी कर सकती है। इससे सेना को PIA पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण मिल सकता है।
Pakistan Army का विशाल कारोबारी साम्राज्य
Pakistan Army दुनिया की उन गिनी-चुनी सेनाओं में शामिल है, जो बड़े पैमाने पर बिज़नेस भी करती हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक:
- Fauji Foundation की कुल संपत्ति करीब 5.9 अरब डॉलर है
- 2024 में सेना से जुड़ी कंपनियों ने 80 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये की कमाई की
- सेना तेल, सीमेंट, खाद, डेयरी, बैंकिंग, टेलिकॉम, मीडिया, शिक्षा और रियल एस्टेट जैसे 50 से ज्यादा सेक्टर में सक्रिय है
Defence Housing और अरबों की जमीन
Pakistan Army आठ बड़े शहरों में Defence Housing Authority (DHA) का संचालन करती है। इन प्रोजेक्ट्स के तहत सेना के पास करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की जमीन है।
सेना में भ्रष्टाचार के आरोप
Pakistan Army के कई पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर भारी संपत्ति जमा करने के आरोप लगे हैं। पूर्व सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा की रिटायरमेंट के समय उनकी संपत्ति करीब 1,200 करोड़ पाकिस्तानी रुपये बताई गई थी।
Credit Suisse की एक रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan Army के 25 रिटायर्ड अफसरों के स्विस बैंकों में खातों में 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हैं।
पिछले साल PIA क्यों नहीं बिक पाई?
पिछले साल भी Pakistan ने PIA को बेचने की कोशिश की थी, लेकिन निवेशकों ने दो बड़ी मांगें रखीं:
- विमान लीज पर लगने वाले 18% टैक्स में छूट
- PIA का पूरा कर्ज सरकार द्वारा चुकाया जाए
IMF की शर्तों के कारण सरकार ने टैक्स छूट और कर्ज माफी से इनकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि ज्यादातर निवेशक पीछे हट गए।
PIA बेचने से Pakistan को क्या फायदा होगा?
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ का कहना है कि निजीकरण से PIA की साख वापस आएगी।
सरकार अभी 75% हिस्सेदारी बेच रही है। बोली की रकम का सिर्फ 7.5% सरकार के पास जाएगा, जबकि 92.5% रकम PIA को दोबारा खड़ा करने में खर्च होगी।
संभावित फायदे:
- एविएशन सेक्टर का GDP में योगदान बढ़ेगा
- सरकार पर एयरलाइन का खर्च कम होगा
- कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और मेडिकल खर्च नए मालिक उठाएंगे
- नए विमान खरीदे जा सकेंगे (फिलहाल 34 में से सिर्फ 18 विमान उड़ने लायक हैं)
सरकार ने PIA के 67 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को अलग होल्डिंग कंपनी में डाल दिया है, जिसे सरकार खुद चुकाएगी।
निष्कर्ष
Pia bidders की यह बोली प्रक्रिया Pakistan के लिए सिर्फ एक एयरलाइन की बिक्री नहीं, बल्कि आर्थिक अस्तित्व की लड़ाई है। IMF की शर्तें, सेना की भूमिका और निजीकरण की राजनीति—इन सबके बीच PIA का भविष्य तय होने जा रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह सौदा Pakistan की एविएशन इंडस्ट्री को नई उड़ान देगा या फिर नियंत्रण सिर्फ एक हाथ से दूसरे हाथ में जाएगा।













