भारत में आयोजित होने वाले आगामी Commonwealth Games को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक-संचालित और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए गुजरात सरकार ने मल्टी-लेयर सिक्योरिटी और मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करना शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य साफ है-दिल्ली Commonwealth Games की तरह किसी भी प्रकार का दाग दोबारा देश की छवि पर न लगे। इसी उद्देश्य के साथ गुजरात ने एक Zero Profit – Full Transparency Model लागू करने की तैयारी कर ली है, जो मूल रूप से 2006 Melbourne Commonwealth Games से प्रेरित है।
Melbourne मॉडल दुनिया भर में भ्रष्टाचार-मुक्त आयोजन का एक सफल उदाहरण माना जाता है, और उसी को आधार बनाकर गुजरात सरकार एक नई “नॉट-फॉर-प्रॉफिट” आयोजन समिति तैयार कर रही है। इस समिति में राजनीतिक दखल कम होगा और प्रोफेशनल विशेषज्ञ, कॉर्पोरेट गवर्नेंस स्पेशलिस्ट, ऑडिट एक्सपर्ट, इंडियन ओलिंपिक व पैरालिंपिक एसोसिएशन के अधिकारी, एथलीट और CAG-नॉमिनी शामिल होंगे।
सरकार का बड़ा निर्णय: 500 करोड़ से बड़े किसी भी सिंगल कॉन्ट्रैक्ट पर पूर्ण रोक
भ्रष्टाचार की संभावना सबसे अधिक बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में होती है-इसी जोखिम को कम करने के लिए गुजरात सरकार ने स्पष्ट नियम बनाया है कि:
➤ कोई भी सिंगल कॉन्ट्रैक्ट 500 करोड़ रुपये से अधिक का नहीं होगा।
छोटे पैकेजों में अधिक कंपनियां बोली लगाती हैं जिससे ईमानदार प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और कीमतों में पारदर्शिता रहती है। यह नियम Commonwealth Games के भविष्य के सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई से जुड़े टेंडर्स पर लागू होगा।
Melbourne Model बनाम Ahmedabad Model: क्या अंतर होंगे?
| क्षेत्र | Melbourne Model | Ahmedabad Model |
|---|---|---|
| समिति | Not-for-Profit | Not-for-Profit |
| बोर्ड संरचना | 12 में से 8 प्रोफेशनल, 4 सरकारी अधिकारी | प्रोफेशनल्स + एक्सपर्ट्स + एथलीट + इंडियन ओलिंपिक/पैरालिम्पिक अधिकारी + सीमित सरकारी अधिकारी + 1 CAG प्रतिनिधि |
| टेंडर प्रक्रिया | 100% ई-प्रोक्योरमेंट | 100% ई-प्रोक्योरमेंट अनिवार्य |
| वेंडर शर्तें | सभी कॉन्ट्रैक्ट सार्वजनिक पोर्टल पर | रियल-टाइम डिस्क्लोजर सिस्टम |
| पोस्ट-इवेंट | 9 महीने में ऑडिट पूरा, कमेटी भंग | भारत में भी ऑडिट के तुरंत बाद कमेटी भंग |
कैसी होगी नई आयोजन समिति?
नई Commonwealth Games Ahmedabad Organising Committee चार प्रमुख श्रेणियों में बनी होगी-प्रोफेशनल्स, खेल अधिकारी, सरकारी प्रतिनिधि और CAG-नॉमिनी।
संरचना: 7 + 3 + 4 + 1 मॉडल
- 7 प्रोफेशनल्स
- अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन विशेषज्ञ
- कॉर्पोरेट गवर्नेंस स्पेशलिस्ट
- फंड मैनेजमेंट एक्सपर्ट
- इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट विशेषज्ञ
- 3 खेल अधिकारी
- इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन का प्रतिनिधि
- पैरालिम्पिक एसोसिएशन का प्रतिनिधि
- राष्ट्रीय स्तर का एथलीट
- 4 वरिष्ठ सरकारी अधिकारी
- वित्त सचिव
- खेल सचिव
- गृह/इंटेलिजेंस सचिव
- इंफ्रास्ट्रक्चर सचिव
- 1 CAG द्वारा नॉमिनेटेड अधिकारी
यह समिति दिसंबर के अंत तक पूरी तरह गठित हो जाएगी।
CAG की सभी अनुशंसाएँ होंगी कानूनी रूप से अनिवार्य
भारत में पहली बार किसी खेल आयोजन में CAG (Comptroller and Auditor General) की सभी महत्वपूर्ण सिफारिशों को कानूनी ताकत दी जा रही है।
CAG ने 2010 से 2018 के बीच कुल 32 सिफारिशें दी थीं, जिनका मकसद बड़े सरकारी खेल आयोजनों में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाना था।
अब यह सभी सिफारिशें Commonwealth Games Ahmedabad में अनिवार्य रूप से लागू होंगी।
CAG की प्रमुख अनुशंसाएँ जो लागू होंगी
हर बड़ा कॉन्ट्रैक्ट ई-टेंडरिंग से
हर भुगतान की डिजिटल रसीद पब्लिक पोर्टल पर
हर प्रोजेक्ट का थर्ड-पार्टी वैल्यूएशन
इवेंट खत्म होते ही ऑडिट रिपोर्ट जमा
वेंडर नेटवर्क पर AI आधारित निगरानी
टेंडर्स की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग
AI आधारित Red-Flag Engine: भ्रष्टाचार रोकने का सबसे बड़ा हथियार
आगामी Commonwealth Games में गुजरात सरकार पहली बार एक उन्नत AI Red-Flag Engine लागू कर रही है। यह टेक्नोलॉजी देश में खेल आयोजनों की पारदर्शिता का नया मानक स्थापित करेगी।
यह AI सिस्टम क्या करेगा?
- वेंडर्स की ब्लैकलिस्टिंग इतिहास जांचेगा
- संदिग्ध कंपनियों और उनकी सहयोगी फर्मों की पहचान करेगा
- टेंडर वैल्यू में असामान्य अंतर पकड़ लेगा
- प्रतिस्पर्धियों के बोली पैटर्न का विश्लेषण करेगा
- प्राइस कोटेशन की गहराई से समीक्षा करेगा
- किसी भी अनियमितता पर समिति को तुरंत अलर्ट भेजेगा
इस तरह का AI मॉडल Melbourne Commonwealth Games में बेहद सफल रहा था, जिसके कारण वहां Zero Corruption का रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
थर्ड-पार्टी सुपर ऑडिट: लगातार तीन लेयर की जाँच
गुजरात सरकार बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स पर कठोर निगरानी के लिए एक स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट एजेंसी नियुक्त करेगी।
ऑडिट तीन चरणों में होगा:
1. प्रथम ऑडिट-आयोजन समिति द्वारा
2. दूसरा ऑडिट-CAG द्वारा
3. तीसरा ऑडिट-राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा
इसके अलावा, सरकार एक चौथी स्वतंत्र जाँच एजेंसी भी ला सकती है, जिसका उद्देश्य होगा
“हर बड़े प्रोजेक्ट में क्या गलत हो सकता है?”
उसी मॉडल को Melbourne Commonwealth Games में अपनाया गया था, और वह शत-प्रतिशत सफल रहा था।
पहली बार: टेंडर प्रक्रिया की कैमरे से निगरानी
यह भारत में पहली बार होगा कि किसी टेंडर प्रक्रिया की संपूर्ण रिकॉर्डिंग कैमरों के माध्यम से होगी।
- बंद कमरे की बैठकें अब नहीं होंगी
- पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड 2 साल तक सुरक्षित रखा जाएगा
- हर चरण पारदर्शी और सार्वजनिक समीक्षा के लिए उपलब्ध बनाया जाएगा
इसका सीधा उद्देश्य है-दिल्ली Commonwealth Games में सामने आए विवादों को दोहराने से बचना।
रियल-टाइम डिस्क्लोजर सिस्टम
हर कॉन्ट्रैक्ट, हर भुगतान, हर सप्लाई-ऑर्डर रियल-टाइम में पब्लिक पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा ताकि नागरिकों, मीडिया और अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं को हर जानकारी बिना किसी बाधा के उपलब्ध हो सके।
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निष्कर्ष: Ahmedabad का Commonwealth मॉडल बनेगा भारत की पारदर्शिता का नया मानक
गुजरात सरकार का यह कदम न केवल देश की छवि सुधारने वाला है, बल्कि यह भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की पारदर्शिता की रेस में सबसे आगे ला सकता है। Melbourne Commonwealth Games की सफलता को आधार बनाकर, Ahmedabad अब एक Zero Corruption Commonwealth Model की ओर बढ़ रहा है—जहां तकनीक, CAG की निगरानी और सख्त सरकारी नीतियाँ मिलकर खेल जगत में नई मिसाल स्थापित करेंगी।













