डांग जिले में बड़ा खुलासा: ग्राम रोजगार सेवक और उसके पति को 32,800 रुपये की रिश्वत लेते ACB ने रंगे हाथ पकड़ा | Dang Ahwa

🗓️ Published on: December 5, 2025 7:11 pm
Dang Ahwa

Dang Ahwa: गुजरात के आदिवासी बहुल जिले डांग में भ्रष्टाचार का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सुबीर तालुका पंचायत कार्यालय में कार्यरत एक ग्राम रोजगार सेवक और उसके पति को 32,800 रुपये की रिश्वत लेते हुए गुजरात एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई न सिर्फ डांग जिले बल्कि पूरे Dang Ahwa क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई है, क्योंकि यह घटना सीधे आम ग्रामीणों से जुड़ी मनरेगा (MGNREGA) जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजना से संबंधित है।

शिकायत से लेकर गिरफ्तारी तक – कैसे हुआ खुलासा

यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक जागरूक नागरिक ने ACB से संपर्क किया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने अपने गांव के चार अलग-अलग आवेदकों के लिए मनरेगा योजना के तहत भूमि समतलीकरण (Land Levelling) कार्य की फाइलें तैयार की थीं। इन फाइलों को आगे बढ़ाने और प्रशासनिक स्वीकृति (Administrative Approval) प्राप्त करने के लिए उसे सुबीर तालुका पंचायत कार्यालय की मनरेगा शाखा में जाना पड़ा।

यहां उसकी मुलाकात हुई अनुसूयाबेन हेमंतभाई पटेल (उम्र 47) से, जो संविदा आधार पर ग्राम रोजगार सेवक के रूप में कार्यरत थीं। शिकायत के अनुसार, अनुसूयाबेन ने प्रत्येक आवेदक से 8,200 रुपये और कुल 32,800 रुपये की रिश्वत की मांग की।

शिकायतकर्ता इस अवैध मांग से नाराज हुआ और तुरंत Gujarat ACB के पास जाकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। ACB ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जाल बिछाने की योजना बनाई।

ACB ने स्टिंग ऑपरेशन की तरह बिछाया ट्रैप

ACB की टीम ने 4 दिसंबर 2025 को ट्रैप की कार्रवाई शुरू की। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता एक बार फिर अनुसूयाबेन से मिला, जहां उसके साथ वही रिश्वत से संबंधित बातचीत हुई जिसकी जानकारी पहले ही ACB को दी गई थी।

बातचीत के बाद अनुसूयाबेन ने शिकायतकर्ता से कहा कि मांगी गई 32,800 रुपये की राशि उसके पति हेमंतभाई विनुभाई पटेल (उम्र 40) को दे दे। ACB ने सभी गतिविधियों पर नजर रखी और जैसे ही योजना के अनुसार शिकायतकर्ता सुबीर तालुका पंचायत कार्यालय के मुख्य गेट के सामने स्थित विपुलभाई गामित की दुकान के पास पहुंचा, वहां उपस्थित ACB टीम भी सतर्क हो गई।

जैसे ही हेमंतभाई ने शिकायतकर्ता के हाथ से 32,800 रुपये की नकद रिश्वत स्वीकार की, उसी क्षण ACB की टीम ने तत्काल कार्रवाई की और दोनों—अनुसूयाबेन पटेल और उनके पति हेमंतभाई पटेल—को मौके से पकड़ लिया। ACB ने रिश्वत की रकम भी मौके से बरामद कर ली।

भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज

ACB ने दोनों आरोपियों के खिलाफ Prevention of Corruption Act के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी रहेगी और यह भी देखा जाएगा कि क्या इस तरह की गतिविधियाँ मनरेगा योजना से जुड़े अन्य मामलों में भी की गई थीं।

Dang Ahwa क्षेत्र में मचा हड़कंप

यह मामला सामने आते ही पूरे डांग जिले, खासकर Dang Ahwa और आस-पास के गांवों में हड़कंप मच गया। मनरेगा जैसी योजना ग्रामीणों के लिए आजीविका का एक बड़ा साधन है—परंतु इसी योजना में कथित भ्रष्टाचार होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखा गया।

सामान्यत: मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देना, भूमि सुधार कराना, खेतों को उपजाऊ बनाना और ग्रामीणों को स्थायी संसाधन उपलब्ध कराना है। लेकिन जब इसी योजना में रिश्वतखोरी जैसी गतिविधियाँ सामने आती हैं, तो इसका सीधा नुकसान गरीब और जरूरतमंद परिवारों को होता है।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

डांग और Dang Ahwa क्षेत्र के कई स्थानीय लोगों ने इसे दुखद और शर्मनाक बताया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में इस तरह की रिश्वतखोरी के कारण सामान्य नागरिकों के कार्य समय पर नहीं हो पाते, और आम लोगों को अनावश्यक वित्तीय दबाव झेलना पड़ता है।

स्थानीय सामाजिक संगठनों ने ACB की इस कार्रवाई की सराहना की और इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ सकारात्मक कदम” बताया। कई ग्रामीणों ने कहा कि अगर ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई होती रहे, तो सरकारी योजनाएँ वास्तव में लाभार्थियों तक पहुंच पाएंगी।

ACB की बढ़ी हुई सक्रियता

गुजरात ACB पिछले कुछ समय से डांग सहित आदिवासी क्षेत्रों में लगातार सघन कार्रवाई कर रही है। मनरेगा, पंचायत, जलापूर्ति और राजस्व विभाग से जुड़े कई मामलों में ट्रैप ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इस ताजा कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि ACB इन क्षेत्रों में निगरानी और कठोर कार्रवाई जारी रखेगी।

क्या कहती है यह घटना?

यह मामला कई महत्वपूर्ण संकेत देता है—

  • सरकारी कार्यालयों में निचले स्तर पर भी भ्रष्टाचार मौजूद है।
  • मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण और गरीब-हितैषी योजना में रिश्वतखोरी नहीं होनी चाहिए।
  • जागरूक नागरिकों की पहल बड़े मामलों को उजागर कर सकती है।
  • ACB की सक्रियता से Dang Ahwa और पूरे डांग जिले में भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती है।

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निष्कर्ष

Dang Ahwa क्षेत्र में सामने आया 32,800 रुपये की रिश्वत का यह मामला एक बड़ा संकेत है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। ACB द्वारा की गई इस कार्रवाई ने न केवल दो आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा, बल्कि यह भी संदेश दिया कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जागरूक नागरिकों की तत्परता और ACB की मजबूत कार्यवाही ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यदि समाज और कानून मिलकर खड़े हों, तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सकती है।