डांग जिले की पवित्र धरती एक बार फिर सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और धार्मिक चेतना की साक्षी बनने जा रही है। जिले के वासुरना गांव में स्थित तेजस्वी संस्कृति धाम की ओर से द्वितीय आदिवासी सामूहिक विवाह महोत्सव का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम न केवल विवाह संस्कार तक सीमित है, बल्कि आदिवासी समाज के सर्वांगीण उत्थान की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।
दिनांक 14 दिसंबर 2025, रविवार को आयोजित होने वाले इस सामूहिक विवाह समारोह में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की 101 कन्याएं पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ अपने नए वैवाहिक जीवन की शुरुआत करेंगी। यह आयोजन तेजस्वी संस्कृति चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है, जिसे धर्म, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में एक समर्पित संस्था के रूप में जाना जाता है। इस विशेष रिपोर्ट में Dang News आपको इस महोत्सव से जुड़ी हर अहम जानकारी विस्तार से दे रहा है।
आदिवासी समाज के उत्थान का संकल्प
डांग जिला, जो अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है, लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा है। विशेष रूप से विवाह जैसे सामाजिक संस्कार आदिवासी परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बन जाते हैं। इसी समस्या को समझते हुए तेजस्वी संस्कृति धाम ने सामूहिक विवाह की परिकल्पना को साकार किया है।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज को आर्थिक दबाव से मुक्त करना, फिजूलखर्ची पर रोक लगाना और सादगीपूर्ण, धार्मिक और संस्कारयुक्त विवाह को बढ़ावा देना है। यह महोत्सव सामाजिक समानता, सहयोग और सामूहिकता का जीवंत उदाहरण है।
संतों के आशीर्वाद से संपन्न होगा पावन आयोजन
इस द्वितीय आदिवासी सामूहिक विवाह महोत्सव को परम पूज्य संत श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम नरेशाचार्यजी महाराज का पावन आशीर्वाद प्राप्त है। इसके साथ ही यह शुभ कार्य पूज्य आद्य शक्ति माताजी के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा।
तेजस्वी संस्कृति धाम के अनुसार, संतों का मार्गदर्शन और आशीर्वाद इस आयोजन को केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुष्ठान बनाता है। विवाह करने वाले नवदंपतियों को धार्मिक संस्कारों के साथ जीवन के मूल्यों की शिक्षा भी दी जाएगी।
तेजस्वी संस्कृति धाम का व्यापक उद्देश्य
वासुरना स्थित तेजस्वी संस्कृति धाम का उद्देश्य केवल सामूहिक विवाह आयोजित करना नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज में संस्कृति का संचार, धर्म के प्रति जागरूकता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
धाम का स्पष्ट संदेश है
“खुद ज्ञान हासिल करके जागरूक लोगों को संस्कृति और धर्म के बारे में जागरूक करना।”
इसी सोच के तहत यह संस्था आदिवासी युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को अपनी परंपराओं से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र
तेजस्वी संस्कृति चैरिटेबल ट्रस्ट सालभर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है। इनमें शामिल हैं:
- धार्मिक सत्संग
- भजन-कीर्तन
- वेदपाठ और मंत्रोच्चार
- भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित ज्ञान सत्र
- आदिवासी परंपराओं से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम
इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य समाज में नैतिकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करना है। Dang News से बात करते हुए ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों ने बताया कि यह धाम आने वाले वर्षों में आदिवासी समाज के लिए एक प्रेरणास्थल बनकर उभरेगा।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में कई प्रमुख और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में:
- निमिषा नीलेश नायक (मंत्री)
- ट्रस्टी रमेशभाई वेलानिया
- तेजस्वी संस्कृति परिवार के वरिष्ठ सदस्य
शामिल होंगे।
इसके अलावा, ट्रस्ट के संरक्षक परम पूज्य स्वामी रामनरेशाचार्यजी महाराज, परम पूज्य केसरबेन गोंडालिया, तथा गाइड और मेंटर के रूप में परम पूज्य डॉ. बी. के. मकवाना विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
101 जोड़ों के लिए नई शुरुआत
इस सामूहिक विवाह महोत्सव में शामिल होने वाले 101 जोड़े आदिवासी समाज से ताल्लुक रखते हैं, जिनके परिवार सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण बड़े विवाह समारोह आयोजित करने में असमर्थ थे।
ट्रस्ट की ओर से प्रत्येक जोड़े को आवश्यक घरेलू सामान, कपड़े और अन्य उपयोगी सामग्री भी प्रदान की जाएगी, ताकि वे सम्मानजनक ढंग से अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत कर सकें। यह पहल आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
“समाज हितैषी विकास… शिवोहम… शिवोहम…”
तेजस्वी संस्कृति धाम का यह आयोजन “समाज हितैषी विकास… शिवोहम… शिवोहम…” के प्रेरक नारे के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। यह नारा समाज के हर वर्ग को जोड़ने, सहयोग बढ़ाने और मानवता के मूल्यों को सशक्त करने का संदेश देता है।
Dang News–Saurashtra Express के अनुसार, यह आयोजन उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने की भावना रखते हैं।
सहयोग की अपील
तेजस्वी संस्कृति धाम ने धार्मिक और सामाजिक सोच रखने वाले सभी लोगों से इस पुनीत कार्य में सहयोग करने की अपील की है। ट्रस्ट का मानना है कि समाज के सामूहिक सहयोग से ही ऐसे बड़े आयोजन सफल हो सकते हैं।
जो भी दानदाता इस कार्य में आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं, वे ट्रस्ट के आधिकारिक बैंक खाते के माध्यम से दान कर सकते हैं। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि दान की राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ सामाजिक कार्यों में किया जाएगा।
पूज्य हेतल दीदी और पूज्य डॉ. केतन दादा की भूमिका
इस पावन आयोजन में पूज्य हेतल दीदी और पूज्य डॉ. केतन दादा की विशेष भूमिका रहेगी। उनकी मौजूदगी और मार्गदर्शन से यह कार्यक्रम और भी अधिक प्रभावशाली और सफल बनने की उम्मीद है। दोनों लंबे समय से समाजसेवा और सांस्कृतिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
आदिवासी संस्कृति को मिलेगी नई मजबूती
डांग जिले की आदिवासी संस्कृति अपनी सादगी, प्रकृति प्रेम और सामूहिक जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध है। यह सामूहिक विवाह महोत्सव न केवल इन मूल्यों को संरक्षित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण भी स्थापित करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज में एकता, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।
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निष्कर्ष
वासुरना स्थित तेजस्वी संस्कृति धाम द्वारा आयोजित द्वितीय आदिवासी सामूहिक विवाह महोत्सव डांग जिले के इतिहास में एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक अध्याय जोड़ने जा रहा है। 101 कन्याओं का विवाह, संतों का आशीर्वाद, समाजसेवियों की भागीदारी और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प-यह सब मिलकर इस आयोजन को एक मिसाल बनाता है।
Dang News–Saurashtra Express के माध्यम से हम यह कह सकते हैं कि यह महोत्सव केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है, जो आने वाले वर्षों तक समाज को प्रेरित करता रहेगा।













