india russia : दोनों देशों को एक-दूसरे के मिलिट्री बेस का अधिकार, RELOS करार से बढ़ी रणनीतिक साझेदारी

🗓️ Published on: December 3, 2025 2:13 pm
india russia

india russia संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। रूस की संसद के निचले सदन स्टेट डूमा ने भारत और रूस के बीच हुए अहम सैन्य समझौते RELOS को मंजूरी दे दी है। इस करार के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के मिलिट्री बेस, पोर्ट, एयरफील्ड और लॉजिस्टिक सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगी।

मंजूरी ऐसे समय पर मिली है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ ही दिनों में भारत आने वाले हैं। यह फैसला india russia रणनीतिक साझेदारी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

RELOS करार: india russia सैन्य सहयोग का नया आधार

यह करार 18 फरवरी 2024 को हुआ था। पिछले सप्ताह रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे संसद की मंजूरी के लिए भेजा था, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है।

इस RELOS समझौते के तहत:

  • दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के बेस पर रुक सकेंगी
  • फाइटर जेट और युद्धपोत ईंधन भर सकेंगे
  • सैन्य उपकरणों की मरम्मत, स्टॉक रिफिल और मेडिकल सहायता मिल सकेगी
  • मिलिट्री मूवमेंट और ट्रांजिट ऑपरेशन तेज होंगे
  • सभी खर्च समान रूप से साझा किए जाएंगे

यह करार india russia संबंधों को रणनीतिक रूप से और मजबूती देता है।

रूस की संसद: भारत-रूस के रिश्ते बेहद मजबूत’

डूमा के स्पीकर ने कहा कि india russia रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं और यह करार उन्हें और गहरा करेगा।

रूसी सरकार ने भी स्पष्ट किया कि इससे दोनों देशों की सेनाओं की ऑपरेशनल क्षमताएं और सहयोग बढ़ेगा, खासकर संकट की घड़ी में एक-दूसरे की सहायता करना आसान होगा।

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेेश त्रिपाठी ने पुष्टि की कि करार अंतिम चरण में है और इससे अमेरिका और रूस के बीच किसी सैन्य टकराव जैसी स्थिति नहीं बनेगी।

इस समझौते के बाद भारत दुनिया का ऐसा पहला देश होगा जिसके पास अमेरिका और रूस दोनों के साथ सैन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट होंगे—यह india russia साझेदारी को बेहद खास बनाता है।

क्यों महत्वपूर्ण है RELOS?

Reciprocal Exchange of Logistics Support को india russia रक्षा सहयोग का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसके फायदे:

लॉजिस्टिक पहुंच का विस्तार

भारत को रूस के विशाल सैन्य नेटवर्क

  • आर्कटिक क्षेत्र
  • पैसिफिक पोर्ट
  • व्लादिवोस्तोक
  • मध्य एशिया के एयरफील्ड

तक पहुंच मिलेगी।

रूस को भारतीय नौसेना के रणनीतिक बेस का फायदा मिलेगा, जो दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री लेनों के पास हैं।

सैन्य ऑपरेशन होंगे सस्ते और आसान

  • ईंधन की उपलब्धता
  • उपकरणों का रखरखाव
  • आपदा राहत
  • युद्धाभ्यास

सब कुछ अधिक सुगम हो जाएगा।

भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता मजबूत

भारत पहले ही अमेरिका (LEMOA), फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के साथ ऐसे करार कर चुका है।
रूस के जुड़ने से india russia सहयोग रक्षा क्षेत्र में और मजबूत हो गया है।

पुतिन की भारत यात्रा: दिल्ली में कड़े सुरक्षा प्रबंध

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत पहुंचेंगे और 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में भाग लेंगे।

उनकी सुरक्षा के लिए:

  • दिल्ली में मल्टी-लेयर सुरक्षा
  • SWAT, QRT, ATS टीमें
  • हाई-टेक निगरानी व्यवस्था
  • रूस की 50 सदस्यीय सुरक्षा टीम पहले ही पहुँच चुकी

इन सबके बीच india russia के सबसे अहम मुद्दे-रक्षा सहयोग और नई डील्स पर चर्चा होगी।

SU-57 जेट: रूस भारत को देगा अपना सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर?

रूस पहले ही संकेत दे चुका है कि वह भारत को अपना अत्याधुनिक SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने को तैयार है।
भारत अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए नए विकल्प तलाश रहा है, ऐसे में यह चर्चा india russia सहयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

SU-57 की विशेषताएं:

  • स्टेल्थ क्षमता
  • सुपरक्रूज़ स्पीड
  • आधुनिक एवियोनिक्स
  • मल्टीरोल कॉम्बैट क्षमता

भारत इसे गंभीरता से एक संभावित विकल्प के रूप में देख रहा है।

भविष्य की बड़ी योजनाएँ: S-500, नया ब्रह्मोस, संयुक्त वॉरशिप

पुतिन की इस यात्रा के दौरान india russia सहयोग पर कई बड़े प्रोजेक्ट चर्चा में रहेंगे:

1. S-500 प्रणाली पर संभावित साझेदारी

रूस की भविष्य की एयर डिफेंस प्रणाली, जिसे अगली पीढ़ी की मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी माना जा रहा है।

2. ब्रह्मोस का नया उन्नत संस्करण

दोनों देश मिलकर पहले से ही ब्रह्मोस विकसित कर चुके हैं।
अब इसके अगले वर्ज़न पर बातचीत होगी।

3. संयुक्त रूप से वॉरशिप निर्माण

indian navy के लिए आधुनिक युद्धपोत बनाने पर सहयोग बढ़ सकता है।

भारत और S-400: अतिरिक्त सिस्टम खरीदने की संभावनाएँ

सूत्रों के अनुसार भारत S-400 रक्षा प्रणाली के अतिरिक्त यूनिट खरीदने पर विचार कर सकता है।

इसकी वजह:
सिस्टम ने पाकिस्तान सीमा पर “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।

डील की वर्तमान स्थिति

  • 5 सिस्टम की डील पहले से तय
  • 3 भारत को मिल चुके
  • 4th डिलीवरी यूक्रेन युद्ध के कारण रुकी
  • 5th आगे की स्थिति पर निर्भर

S-400 क्यों खास है?

यह दुनिया की सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों में से एक है और:

  • फाइटर जेट
  • ड्रोन
  • क्रूज़ मिसाइल
  • बैलिस्टिक मिसाइल
  • स्टेल्थ एयरक्राफ्ट

सब पर वार करने में सक्षम है।

india russia रक्षा संबंधों में यह सिस्टम लंबे समय से बेहद महत्वपूर्ण रहा है।

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वैश्विक भू-राजनीति में india russia करार का महत्व

यह करार ऐसे समय हुआ है जब:

  • विश्व में US–Russia तनाव जारी
  • चीन का प्रभाव बढ़ रहा
  • एशिया में शक्ति संतुलन बदल रहा

भारत अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति पर चलते हुए दोनों वैश्विक शक्तियों के साथ समान रूप से जुड़ा हुआ है। RELOS pact से:

  • भारत की आर्कटिक और पैसिफिक तक पहुँच बढ़ेगी
  • रूस के साथ रक्षा सहयोग गहरा होगा
  • समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी

दूसरी ओर रूस के लिए भारत एक विश्वसनीय दीर्घकालिक रक्षा भागीदार बना रहेगा।

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निष्कर्ष: india russia संबंधों में नया स्वर्णिम अध्याय

RELOS करार की मंजूरी india russia साझेदारी को नई ऊर्जा देती है।
पुतिन की यात्रा में:

  • SU-57 पर निर्णय
  • S-500 सहयोग
  • अतिरिक्त S-400
  • ब्रह्मोस का नया संस्करण
  • संयुक्त युद्धपोत परियोजना

जैसे मुद्दे दोनों देशों के रक्षा भविष्य को नई दिशा देंगे।

india russia सहयोग आने वाले वर्षों में एशिया और वैश्विक सुरक्षा ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।