Rupee against dollar गिरकर 90.41 पर पहुंचा, आयात और छात्रों के लिए महंगा साबित होगा

🗓️ Published on: December 7, 2025 11:58 pm
Rupee against dollar

Rupee against dollar: 4 दिसंबर 2025 को भारतीय रुपया (INR) डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, आज रुपया डॉलर के मुकाबले 28 पैसे गिरकर 90.41 पर ट्रेड हुआ, जबकि 3 दिसंबर को यह 90.15 पर बंद हुआ था। इस गिरावट के पीछे विदेशी फंडों की लगातार निकासी और वैश्विक आर्थिक दबाव मुख्य कारण हैं।

इस साल 2025 की शुरुआत से ही रुपया डॉलर के मुकाबले 5.5% कमजोर हो गया है। 1 जनवरी को रुपया 85.70 पर था, जो अब 90.41 तक पहुँच गया है।

रुपया कमजोर होने से आयात महंगा होगा

रुपये की गिरावट का सीधा असर भारत के लिए आयात पर पड़ता है। इससे तेल, सोना और अन्य आवश्यक वस्तुएँ महंगी हो जाएँगी। इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वाले छात्रों के लिए भी खर्च बढ़ जाएगा।

उदाहरण के लिए, जब रुपया डॉलर के मुकाबले 50 था, तब भारतीय छात्रों को 1 डॉलर के लिए 50 रुपये देने पड़ते थे। अब 1 डॉलर के लिए उन्हें 90.41 रुपये खर्च करने होंगे। इससे उनकी ट्यूशन फीस, रहने और खाने-पीने का खर्च बढ़ जाएगा।

रुपये की गिरावट के मुख्य कारण

  1. अमेरिका के टैरिफ और व्यापार तनाव:
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय आयात पर 50% तक के टैरिफ लगाए हैं। इसका असर भारत की GDP वृद्धि पर 60-80 बेसिस पॉइंट तक हो सकता है और राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है। इससे भारतीय निर्यात घटने का खतरा है और विदेशी मुद्रा की आमदनी पर दबाव पड़ रहा है।
  2. विदेशी निवेशकों की निकासी:
    जुलाई 2025 से अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय परिसंपत्तियों में ₹1.03 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली की है। इसका मुख्य कारण अमेरिका के टैरिफ और व्यापार अनिश्चितता को लेकर चिंता है। इस बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ गई है, जिससे रुपया कमजोर हुआ है।
  3. तेल और सोने की कंपनियों का हेजिंग:
    तेल और सोने की कंपनियाँ अपने व्यापार को सुरक्षित करने के लिए डॉलर खरीद रही हैं। अन्य आयातक भी टैरिफ अनिश्चितता के कारण डॉलर का स्टॉक कर रहे हैं। इस गतिविधि से रुपया लगातार दबाव में रहा है।

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RBI का हस्तक्षेप कम रहा

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट, जतिन त्रिवेदी ने बताया कि रुपया 90 के पार जाने का मुख्य कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर स्पष्ट जानकारी का अभाव और समयसीमा में लगातार देरी रही है। इसके चलते पिछले कुछ हफ्तों में रुपया तेजी से बिकता रहा।

उन्होंने आगे कहा कि मेटल और गोल्ड की रिकॉर्ड ऊँची कीमतों ने आयात बिल को बढ़ाया है। अमेरिका के उच्च टैरिफ ने भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुँचाया। इस बार RBI का हस्तक्षेप भी अपेक्षाकृत कम रहा, जिससे गिरावट तेज हुई।

शुक्रवार को RBI की नीति घोषणा होने वाली है, और बाजार की उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक मुद्रा को स्थिर करने के लिए कुछ कदम उठाएगा। तकनीकी दृष्टि से, रुपया काफी हद तक ओवरसोल्ड स्थिति में है।

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मुद्रा का मूल्य कैसे तय होता है? Rupee against dollar

किसी भी मुद्रा का मूल्य दूसरे विदेशी मुद्रा के मुकाबले घटने या बढ़ने पर तय होता है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने को मुद्रा अवमूल्यन (currency depreciation) कहा जाता है।

हर देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार (foreign currency reserves) होते हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन होते हैं। यदि भारत के फॉरेन रिज़र्व में पर्याप्त डॉलर मौजूद हैं, तो रुपया स्थिर रहेगा। लेकिन अगर डॉलर की मात्रा घटती है, तो रुपया कमजोर होगा और बढ़ने पर यह मजबूत होगा।