Sanchar Saathi app case: सरकार के आदेश पर बढ़ा विवाद, विपक्ष ने लगाया निजता हनन का आरोप

🗓️ Published on: December 2, 2025 5:54 pm
Sanchar Saathi app

भारत में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा सभी नए स्मार्टफोनों में Sanchar Saathi app को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर एक तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सरकार का कहना है कि यह कदम नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए आवश्यक है, जबकि विपक्ष इसे ‘‘निजता में हस्तक्षेप’’ और ‘‘निगरानी का नया हथकंडा’’ बता रहा है।

विवाद तब और गहरा गया जब आदेश जारी होने के अगले ही दिन केंद्र ने स्पष्ट किया कि यह ऐप ‘‘अनिवार्य नहीं’’ है और उपयोगकर्ता चाहें तो इसे हटा भी सकते हैं। लेकिन पहली घोषणा, जिसमें कहा गया था कि ऐप को फोन में डिलीट तक नहीं किया जा सकेगा, पहले ही संदेह और सवाल पैदा कर चुकी थी।

Sanchar Saathi app case अब एक तकनीकी मुद्दे से आगे बढ़कर निजता, डिजिटल सुरक्षा, सरकारी पारदर्शिता और नागरिक स्वतंत्रता के राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है।

सरकार की सफाई-फरजियात नहीं, चाहें तो ऐप हटाएँ

टेलीकॉम विभाग (DoT) द्वारा जारी आदेश में सभी मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने नए उपकरणों में Sanchar Saathi app को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करें और 90 दिनों के भीतर इस निर्देश को लागू करें। यह भी कहा गया कि पुरानों फोनों में यह ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से भेजा जाएगा।

लेकिन मंगलवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बयान दिया:

  • “यह अनिवार्य ऐप नहीं है। उपभोक्ता चाहे तो इसे डिलीट कर सकते हैं।”
  • “सरकार का उद्देश्य केवल साइबर सुरक्षा को मजबूत करना है, नागरिकों की निजी जानकारी पर निगरानी रखना नहीं।”

सरकार का तर्क है कि यह ऐप मोबाइल चोरी, डुप्लिकेट IMEI नंबर और साइबर फ्रॉड जैसे तेजी से बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाएगा।

विपक्ष का आरोप-यह एक जासूसी ऐप है, सरकार हर नागरिक पर नजर रखना चाहती है”

Sanchar Saathi app case ने विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोलने का मौका दे दिया है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:

  • “यह लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है।”
  • “यह केवल फोन टेपिंग का मामला नहीं, बल्कि पूरे देश को तानाशाही की ओर ले जाने जैसा कदम है।”
  • “एक रिपोर्टिंग सिस्टम जरूरी है, लेकिन यह आदेश नागरिकों के निजी जीवन में अनावश्यक दखल है।”

प्रियंका गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की मंशा हर नागरिक की गतिविधि पर नजर रखना है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाने और आगे की रणनीति तय करने की बात कही है।

विपक्षी बयानों की बौछार-प्राइवेसी, संविधान और सुप्रीम कोर्ट का हवाला

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल

  • “यह सीधे-सीधे प्राइवेसी पर हमला है।”
  • “साइबर सुरक्षा की आड़ में भाजपा आम नागरिकों की निजी जानकारी जुटाना चाहती है।”
  • “हमारे देश ने पिगैसस जैसा जासूसी कांड पहले ही देखा है, अब यह नया कदम उसी दिशा में है।”

सांसद शशि थरूर

  • “ऐप उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे स्वैच्छिक होना चाहिए।”
  • “लोकतंत्र में किसी चीज को जबरन थोपना चिंता का विषय है।”
  • “सरकार को जनता के सामने स्पष्ट कारण बताना चाहिए।”

सांसद रेनूका चौधरी

  • “संविधान की धारा 21 के तहत प्राइवेसी मौलिक अधिकार है।”
  • “Sanchar Saathi app case नागरिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है।”

CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास

  • “यह सुप्रीम कोर्ट के 2017 के Puttaswamy फैसले का उल्लंघन है।”
  • “ऐप डिलीट नहीं किया जा सकेगा-यह तथ्य खतरनाक है और 120 करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ताओं पर थोपे जाने जैसा है।”

Sanchar Saathi app क्या है और कैसे काम करता है?

यह सरकार द्वारा विकसित एक साइबर सुरक्षा टूल है जिसे जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था। ऐप का मुख्य उद्देश्य:

  • मोबाइल फोन चोरी या खोने पर IMEI ब्लॉक करके डिवाइस को निष्क्रिय करना
  • फ्रॉड कॉल, स्कैम, वाट्सऐप संदेशों और स्पैम की रिपोर्टिंग
  • नकल किए गए IMEI नंबर वाले डिवाइस की पहचान
  • फर्जी मोबाइल बिक्री और नेटवर्क दुरुपयोग पर रोक लगाना

सरकार के अनुसार, अब तक इस ऐप की मदद से 7 लाख से अधिक चोरी हुए या खोए मोबाइल फोन वापस मिल चुके हैं

DoT का कहना है कि यह ऐप देशभर में बढ़ते साइबर अपराध पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत में डुप्लिकेट IMEI से बढ़ रही है साइबर क्राइम की समस्या

भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल बाजार है-120 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता
लेकिन उसी तेजी से साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं, खासकर:

  • IMEI क्लोनिंग
  • ऑनलाइन फ्रॉड
  • चोरी के फोन का काला बाजार
  • साइबर ठगी के लिए नकली डिवाइस का इस्तेमाल

IMEI (15 अंकों का यूनिक कोड) मोबाइल की पहचान है, लेकिन अपराधी इसे क्लोन करके फोन को ट्रैक होने से बचा लेते हैं।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार
सितंबर 2024 तक 22.76 लाख डिवाइस संदिग्ध गतिविधियों में पाए गए।

ऐसे में सरकार का कहना है कि Sanchar Saathi app पुलिस और जांच एजेंसियों को डिवाइस ट्रेसिंग में तकनीकी बढ़त देगा।

Apple और अन्य कंपनियाँ उलझन में-प्री-इंस्टॉल ऐप की अनुमति नहीं

टेक उद्योग में इस आदेश को लेकर असमंजस दिख रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार:

  • Apple की पॉलिसी किसी भी थर्ड-पार्टी या सरकारी ऐप को प्री-लोड करने की अनुमति नहीं देती।
  • पहले भी Apple का TRAI के एंटी-स्पैम ऐप को लेकर टकराव हो चुका है।
  • कई कंपनियाँ सरकार के साथ बातचीत कर समाधान खोजने की कोशिश कर सकती हैं।

अब स्थिति यह है कि कंपनियों को:

  • या तो अपनी पॉलिसी ढीली करनी होगी,
  • या सरकार इस ऐप को ‘‘स्वैच्छिक इंस्टॉलेशन’’ मॉडल में बदल सकती है।

सरकार ने अभी तक किसी कंपनी की ओर से दिए गए आपत्ति या प्रतिक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया है।

यूज़र्स के लिए फायदे-क्या सच में मददगार साबित होगा?

सरकार का दावा है कि यह ऐप आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ा लाभ लाएगा:

IMEI आधारित ब्लॉकिंग

चोरी या खोए फोन को तुरंत ब्लॉक किया जा सकेगा।

फ्रॉड कॉल/मैसेज रिपोर्टिंग

स्कैम और डिजिटल ठगी कम हो सकती है।

नेटवर्क दुरुपयोग पर रोक

फर्जी IMEI वाले फोन की पहचान आसान होगी।

लेकिन साथ ही कुछ चिंताएँ भी उठ रही हैं:

ऐप को डिलीट न कर पाने से निजता संबंधी डर

(हालाँकि सरकार ने बाद में सफाई दी कि इसे हटाया जा सकता है)

ऐप में भविष्य में नए फीचर जोड़ने का अधिकार

जिससे डेटा निगरानी की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं।

लोकल और अंतरराष्ट्रीय प्राइवेसी संगठनों की आलोचना

जो पहले ही “डेटा मिनिमाइजेशन” और पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं।

Sanchar Saathi app case : राजनीतिक असर और आगे की राह

विवाद केवल तकनीकी या प्रशासनिक नहीं रहा-यह अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
विपक्ष इसे:

  • चुनावी साल में ‘‘डेटा कंट्रोल’’ की रणनीति,
  • नागरिक निगरानी की तैयारी,
  • और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का संकेत बता रहा है।

वहीं सरकार इसे:

  • राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा का मजबूत कदम,
  • डिजिटल धोखाधड़ी रोकने का समाधान,
  • और ‘‘स्मार्ट गवर्नेंस’’ का हिस्सा बता रही है।

सच यह है कि भारत में डेटा सुरक्षा कानून अभी शुरुआती चरणों में है।
ऐसे में कोई भी सरकारी डिजिटल पहल, विशेषकर ऐसी जिसमें करोड़ों लोगों के डिवाइस शामिल हों, स्वाभाविक रूप से व्यापक बहस का विषय बनती है।

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क्या यह मामला लंबा चलेगा?

संभावना है कि Sanchar Saathi app case:

  • संसद में बहस का विषय बनेगा
  • सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकता है
  • अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों की लॉबी भी इसमें शामिल हो सकती है
  • प्राइवेसी एक्टिविस्ट इसे लेकर अभियान चला सकते हैं

वर्तमान माहौल में इस विवाद का शांत होना मुश्किल दिख रहा है।

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निष्कर्ष-साइबर सुरक्षा बनाम निजता का संघर्ष

भारत डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
लेकिन डिजिटल सुरक्षा और निजी स्वतंत्रता के बीच संतुलन आज सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

Sanchar Saathi app case केवल एक ऐप का मामला नहीं-यह आने वाले वर्षों में भारत के डिजिटल अधिकारों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण विवाद है।

क्या सरकार साइबर सुरक्षा को बिना नागरिकों की प्राइवेसी प्रभावित किए मजबूत बना पाएगी?
क्या विपक्ष के आरोपों में दम है?
क्या टेक कंपनियाँ इस आदेश को स्वीकार करेंगी?
और सबसे बड़ा सवाल-क्या नागरिक अपने डिजिटल अधिकारों के प्रति जागरूक हैं?

इन सभी सवालों के जवाब आने वाले महीनों में साफ होंगे।