जूनागढ़ (गुजरात)-Saurashtra Samachar-Saurashtra express के तहत सामने आई यह खबर न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश को झकझोर देने वाली है। जूनागढ़ जिले के विसावदर तालुका के नानी मोणपरी गांव में मंगलवार तड़के एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी, जिसने ग्रामीण इलाकों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिए हैं। गिर वन सीमा से सटे खेत-वाड़ी क्षेत्र में एक शेरनी ने चार वर्ष के मासूम बच्चे पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद वन विभाग द्वारा शुरू किया गया रेस्क्यू ऑपरेशन भी उस समय बाधित हो गया, जब शेरनी को बेहोश करने के लिए चलाई गई ट्रैंक्विलाइज़र गन की गोली गलती से एक वनकर्मी को जा लगी। घायल वनकर्मी को गंभीर हालत में जूनागढ़ सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गिर की सीमा पर बसे गांवों में बढ़ता खतरा
जूनागढ़ जिले का विसावदर क्षेत्र लंबे समय से गिर जंगल की सीमा से सटा हुआ माना जाता है। यहां के ग्रामीण इलाकों में शेर, शेरनी और तेंदुए जैसे हिंसक वन्य प्राणियों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है। Saurashtra Samachar-Saurashtra express की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में वन्यजीवों के खेतों और वाड़ियों में घुसने की घटनाओं में तेजी देखी गई है।
नानी मोणपरी गांव भी ऐसे ही संवेदनशील इलाकों में आता है, जहां बड़ी संख्या में खेत मजदूर अपने परिवारों के साथ वाड़ियों में अस्थायी रूप से रहते हैं और खेती-मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।
कैसे हुआ पूरा हादसा: सुबह-सुबह गायब हुआ बच्चा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार एक वाड़ी में खेत मजदूरी करता है। मंगलवार की सुबह रोज़ की तरह परिवार के सदस्य काम की तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान उनका चार साल का बेटा अचानक नजरों से ओझल हो गया।
परिवार ने पहले अपने स्तर पर बच्चे की खोज शुरू की। आसपास के खेत, झाड़ियां और वाड़ी के कोने-कोने में तलाश की गई, लेकिन बच्चे का कोई पता नहीं चला। धीरे-धीरे परिजनों को आशंका हुई कि किसी हिंसक जानवर ने बच्चे को उठा लिया है।
वाड़ी मालिक ने दी वन विभाग को सूचना
बच्चे के काफी देर तक न मिलने पर वाड़ी मालिक को मामले की जानकारी दी गई। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वाड़ी मालिक ने तुरंत वन विभाग से संपर्क किया और आशंका जताई कि गिर से भटक कर आई किसी शेरनी ने बच्चे पर हमला किया हो सकता है।
सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया और Saurashtra Samachar-Saurashtra express के अनुसार कुछ ही समय में वनकर्मियों की एक टीम मौके पर पहुंच गई।
खोजबीन के दौरान मिला लहूलुहान शव
वन विभाग की टीम ने वाड़ी क्षेत्र और आसपास की झाड़ियों में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद नानी मोणपरी गांव की सीमा के पास बच्चे का लहूलुहान शव बरामद हुआ।
बच्चे के शरीर पर शेरनी के पंजों और दांतों के गहरे निशान साफ दिखाई दे रहे थे। दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोग भावुक हो उठे।
अस्पताल ले जाने के बाद मृत घोषित
वनकर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से बच्चे को तुरंत जूनागढ़ सिविल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अत्यधिक चोटों और रक्तस्राव के कारण बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पूरे गांव में मातम छा गया और हर आंख नम हो गई।
हमलावर शेरनी को पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की पुष्टि होते ही वन विभाग ने हमलावर शेरनी को पकड़ने के लिए विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सासण गिर से प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को बुलाया गया।
Saurashtra Samachar-Saurashtra express की जानकारी के अनुसार, शेरनी को ट्रैक करने के बाद उसे बेहोश कर पिंजरे में डालने की योजना बनाई गई थी, ताकि आगे किसी और जान-माल की हानि न हो।
ट्रैंक्विलाइज़र गन से फायरिंग के दौरान बड़ा हादसा
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तुवेर (अरहर) के खेत में शेरनी की मौजूदगी की पुष्टि हुई। जैसे ही उसे बेहोश करने के लिए ट्रैंक्विलाइज़र गन से फायर किया गया, अचानक गोली का रुख बदल गया और वह एक वनकर्मी को जा लगी।
इस अप्रत्याशित हादसे में वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा।
घायल वनकर्मी की हालत गंभीर
घायल वनकर्मी को तत्काल जूनागढ़ सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है। सूत्रों के अनुसार, गोली लगने से वनकर्मी को गहरी चोट आई है, हालांकि उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
इस घटना के बाद वन विभाग ने अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू करने की तैयारी की है।
गांवों में भय और दहशत का माहौल
इस दर्दनाक घटना के बाद विसावदर तालुका के ग्रामीण इलाकों में भारी दहशत फैल गई है। खासतौर पर वे किसान और मजदूर जो रात के समय वाड़ियों में रुकते हैं, अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।
Saurashtra Samachar-Saurashtra express के अनुसार, कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाई जाए और वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
वन विभाग का बयान
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि सुबह करीब 9 बजे वाड़ी मालिक से सूचना मिली थी कि एक मजदूर का बच्चा लापता है। तलाश के दौरान बच्चे का शव मिला और प्रारंभिक जांच में शेरनी के हमले की पुष्टि हुई।
अधिकारी ने बताया कि हमलावर शेरनी को पकड़ने के लिए सासण से विशेष टीम बुलाई गई है और जल्द ही उसे ट्रैंक्विलाइज़ कर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाएगा।
गिर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि गिर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। जंगलों के आसपास मानवीय गतिविधियों में वृद्धि, खेती का विस्तार और जल-भोजन की कमी के कारण शेर और शेरनी आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहे हैं।
Saurashtra Samachar-Saurashtra express के तहत सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में जूनागढ़ और अमरेली जिलों में शेरों के हमले की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रशासन से सुरक्षा उपायों की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- गिर सीमा से सटे गांवों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए
- रात के समय गश्त बढ़ाई जाए
- खेत मजदूर परिवारों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था हो
- शेरों की मूवमेंट पर निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए
मासूम की मौत ने छोड़ा गहरा जख्म
चार साल के मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह घटना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
Saurashtra Samachar-Saurashtra express की इस रिपोर्ट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि इस तरह की त्रासदियों को रोका जा सके।
आगे क्या?
वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में:
- शेरनी को पकड़कर सुरक्षित बाड़े में रखा जाएगा
- क्षेत्र में अतिरिक्त वनकर्मी तैनात किए जाएंगे
- ग्रामीणों को सतर्कता और सुरक्षा के लिए जागरूक किया जाएगा
जब तक शेरनी को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक विसावदर और आसपास के गांवों में हाई अलर्ट रहेगा।
निष्कर्ष
Saurashtra Samachar–Saurashtra express की यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि गिर क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर है। एक मासूम की जान जाना पूरे सिस्टम के लिए आत्ममंथन का विषय है। प्रशासन, वन विभाग और समाज — सभी को मिलकर ठोस समाधान की दिशा में काम करना होगा, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।











