अहमदाबाद:
शहर के पॉश इलाके थलतेज में स्थित Snehanjali Society Ahmedabad इन दिनों गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। करीब चार दशक पहले बनी इस रिहायशी सोसाइटी के 25 बंगलों को अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने अवैध निर्माण बताते हुए तोड़ने का नोटिस जारी किया है। हर एक बंगले की मौजूदा कीमत लगभग दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई से आक्रोशित सोसाइटी के निवासी सड़क पर उतर आए हैं और अपने घर बचाने के लिए आत्मदाह तक की चेतावनी दे रहे हैं।
सोमवार सुबह से ही Snehanjali Society Ahmedabad के मुख्य गेट पर दर्जनों परिवार एकजुट होकर बैठे हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की मौजूदगी ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। निवासियों का कहना है कि वे पिछले 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं और अब अचानक उनके घरों को अवैध बताकर तोड़ने की कार्रवाई न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अस्वीकार्य है।
दो लाख में खरीदा था घर, आज कीमत दो करोड़
Snehanjali Society Ahmedabad की स्थापना वर्ष 1983 में हुई थी। वर्ष 1985 के आसपास बिल्डर कांतिलाल पटेल ने इस सोसाइटी में 25 बंगलों का निर्माण कर उन्हें लगभग दो लाख रुपये की कीमत पर बेचा था। उस समय यह एक वैध रिहायशी परियोजना मानी जा रही थी। इनमें से करीब 20 बंगले ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बैंक लोन लेकर खरीदे थे।
निवासियों का कहना है कि जब उन्होंने घर खरीदे थे, तब बैंकों द्वारा सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच की गई थी। यदि जमीन या निर्माण में कोई खामी होती, तो बैंक कभी लोन स्वीकृत नहीं करते। इसके अलावा, पिछले चार दशकों से निवासी नियमित रूप से प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य स्थानीय कर भी भरते आ रहे हैं।
चार दशक बाद सामने आया नया जमीन मालिक
Snehanjali Society Ahmedabad के निवासियों के अनुसार, हाल ही में उन्हें यह जानकारी दी गई कि जिस जमीन पर सोसाइटी बनी है, उसके असली मालिक धर्मेश पटेल हैं। आरोप है कि मूल बिल्डर कांतिलाल पटेल ने जमीन के स्वामित्व से जुड़े तथ्यों को छुपाकर बंगलों का निर्माण और बिक्री की थी।
इस विवाद को लेकर धर्मेश पटेल ने सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया था, जिसमें उनके पक्ष में फैसला आया। कोर्ट के आदेश के बाद अहमदाबाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए Snehanjali Society Ahmedabad के सभी 25 घरों को तोड़ने के लिए नोटिस जारी कर दिए।
नोटिस के बाद उबाल पर हालात
नगर निगम की नोटिस मिलते ही Snehanjali Society Ahmedabad में रहने वाले परिवारों में भय और गुस्सा फैल गया। कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी यहीं गुजार दी है। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को इसी घर में पाला है और अब अचानक बेघर होने की बात सुनकर वे मानसिक रूप से टूट गई हैं।
निवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने उन्हें चांदखेड़ा क्षेत्र में आवास योजना के तहत 1BHK फ्लैट देने का विकल्प दिया है, लेकिन उसका किराया और अन्य खर्च भी उन्हें ही वहन करने होंगे। उनका कहना है कि दो करोड़ रुपये के बंगले के बदले छोटा सा फ्लैट देना उनके साथ मजाक करने जैसा है।
‘हम किसी भी हाल में घर खाली नहीं करेंगे’
Snehanjali Society Ahmedabad की निवासी डिंपलबेन ने कहा,
“हम किसी भी हाल में अपने घर खाली नहीं करेंगे। हम पिछले 40 सालों से यहां रह रहे हैं। अगर ये मकान अवैध थे, तो नगर निगम ने हमें प्रॉपर्टी कार्ड कैसे दिया? हम नियमित टैक्स भरते आए हैं। बैंक ने हमारे दस्तावेज जांचकर लोन दिया, फिर अब कैसे कहा जा सकता है कि सब कुछ गैरकानूनी है?”
डिंपलबेन ने आगे कहा कि अगर निगम जबरन कार्रवाई करता है, तो वे और उनके पड़ोसी यहीं आत्मदाह कर लेंगे। “हम सड़क पर नहीं जाएंगे, हमें मजबूर मत कीजिए,” उन्होंने भावुक स्वर में कहा।
बुजुर्गों और बीमारों की चिंता
Snehanjali Society Ahmedabad की एक अन्य निवासी संगीता चौहान ने बताया कि वे पिछले 32 वर्षों से इस सोसाइटी में रह रही हैं।
“मेरी सास गंभीर रूप से बीमार हैं। वे पूरी रात सो नहीं पातीं। ऐसे में हम उन्हें लेकर कहां जाएंगे? इस उम्र में घर बदलना आसान नहीं होता,” उन्होंने कहा।
संगीता का कहना है कि निगम द्वारा दिया गया विकल्प व्यावहारिक नहीं है। “हमें कहा जा रहा है कि चांदखेड़ा में आवास योजना के तहत 1BHK फ्लैट ले लो और उसका किराया भी खुद भरो। हमारा सारा सामान वहां शिफ्ट करने को कहा जा रहा है। मेरे बंगले की कीमत आज करीब दो करोड़ रुपये है, फिर भी हमें ऐसा विकल्प दिया जा रहा है, जो हमारे जीवन स्तर और जरूरतों से मेल नहीं खाता।”
पुलिस में शिकायत, लेकिन FIR दर्ज नहीं
रविवार को Snehanjali Society Ahmedabad के कई निवासी वस्त्रापुर पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने बिल्डर कांतिलाल पटेल के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उनकी FIR दर्ज नहीं की।
निवासियों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। अब जब वे निर्दोष खरीदार साबित हो रहे हैं, तब भी उन्हें सजा भुगतनी पड़ रही है।
मानवीय समाधान की मांग
Snehanjali Society Ahmedabad के निवासी सरकार और नगर निगम से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी तरह के पुनर्विकास या कानूनी समाधान के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना उचित पुनर्वास के उनके घर तोड़ना अन्याय है।
कई निवासियों ने यह भी सुझाव दिया है कि या तो उन्हें उसी इलाके में समकक्ष मूल्य के घर दिए जाएं या फिर जमीन विवाद का समाधान किसी वैकल्पिक कानूनी रास्ते से निकाला जाए। उनका कहना है कि निर्दोष परिवारों को बेघर करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
शहर के लिए बड़ा सवाल
Snehanjali Society Ahmedabad का मामला सिर्फ 25 बंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शहर के लिए एक चेतावनी है। सवाल यह उठता है कि यदि चार दशक तक वैध मानी गई रिहायशी सोसाइटी को अचानक अवैध घोषित किया जा सकता है, तो शहर के अन्य पुराने इलाकों का भविष्य क्या होगा?
निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन, न्यायपालिका और सरकार मिलकर ऐसा समाधान निकालें, जिससे न तो कानून का उल्लंघन हो और न ही सैकड़ों लोगों की जिंदगी उजड़ जाए। फिलहाल, Snehanjali Society Ahmedabad के गेट पर बैठे परिवार अपने घरों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प लिए हुए हैं।













