Surat news: सूरत शहर में एक 17 वर्षीय पाटीदार समाज की नाबालिग लड़की के अपहरण का मामला अब पूरे गुजरात में सामाजिक और प्रशासनिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। घटना को 35 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जब पुलिस की ओर से कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया, तो पाटीदार समाज का आक्रोश खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। अंततः भारी विरोध, पुलिस स्टेशन के घेराव और सामाजिक दबाव के बाद सूरत पुलिस कमिश्नर ने यह मामला सरथाणा पुलिस स्टेशन से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।
यह मामला केवल एक अपहरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पुलिस की कार्यप्रणाली, समाज में बढ़ते सामाजिक विकार, नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा, और कानून-व्यवस्था की जवाबदेही जैसे कई गंभीर सवाल भी जुड़े हुए हैं। “Surat news” से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने सूरत ही नहीं, बल्कि राज्य भर में चिंता पैदा कर दी है।
35 दिनों से लापता पाटीदार समाज की नाबालिग बेटी
पाटीदार समाज की 17 वर्षीय बेटी के अपहरण की शिकायत दर्ज हुए आज 35 दिन पूरे हो चुके हैं। परिजन और समाज के लोग लगातार पुलिस के चक्कर काटते रहे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। कभी 12 घंटे, कभी 24 घंटे, तो कभी 48 घंटे में लड़की को सुरक्षित वापस लाने का भरोसा दिया गया, लेकिन समय बीतता गया और परिणाम शून्य रहा।
लड़की के परिजनों के अनुसार, वह मूल रूप से गांव में रहती थी, जबकि पढ़ाई और अन्य कारणों से सूरत में अपने काका के साथ रह रही थी। यहीं से उसका अपहरण किया गया। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर एक व्यक्ति अपने साथ ले गया, जो पहले से शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता बताया जा रहा है।
आरोपी: दो बच्चों का पिता, पहले भी ऐसे आरोप
इस पूरे मामले में जिस व्यक्ति का नाम सामने आया है, उस पर आरोप है कि वह पहले भी दो-तीन लड़कियों को भगाकर ले जा चुका है। खुद उसकी पत्नी ने भी इस बात का खुलासा किया है कि उसका पति पहले भी इसी तरह की घटनाओं में शामिल रहा है।
यह तथ्य सामने आने के बावजूद पुलिस द्वारा त्वरित और सख्त कार्रवाई न किए जाने से समाज में भारी नाराजगी है। पाटीदार समाज का कहना है कि जब आरोपी का आपराधिक इतिहास और मोबाइल लोकेशन जैसी जानकारियां उपलब्ध थीं, तब भी पुलिस की ओर से लापरवाही बरती गई।
पाटीदार सेवा संघ की बैठक और समाज का आक्रोश
गुरुवार को पाटीदार सेवा संघ द्वारा तिरुपति सोसायटी की वाड़ी में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में समाज के वरिष्ठ नेता, युवा और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य था – लापता बेटी को जल्द से जल्द खोजने के लिए सामूहिक रणनीति बनाना और पुलिस पर दबाव डालना।
बैठक के बाद सैकड़ों की संख्या में पाटीदार समाज के लोग सरथाणा पुलिस स्टेशन पहुंचे और वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस स्टेशन का घेराव कर समाज ने अपना गुस्सा जाहिर किया। बेटी के भाई ने भावुक होकर समाज से मदद की अपील की और कहा कि 35 दिनों से उनकी बहन परिवार से दूर है और उन्हें उसकी कोई खबर नहीं है।
पुलिस स्टेशन का घेराव और जवाबदेही की मांग
जब समाज के लोग पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो उन्होंने सीधे जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए। समाज का मुख्य सवाल था –
- 35 दिनों से लड़की कहां है?
- वह किसके साथ रह रही है?
- उसकी सुरक्षा की क्या स्थिति है?
इन सवालों का संतोषजनक जवाब न मिलने पर विरोध और तेज हो गया। समाज के नेताओं ने साफ कहा कि अगर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
क्राइम ब्रांच को सौंपा गया मामला
पाटीदार समाज के उग्र विरोध के बाद आखिरकार सूरत पुलिस कमिशनर अनुपम सिंह गहलोत ने इस मामले को सरथाणा पुलिस स्टेशन से हटाकर सूरत क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। यह फैसला तब लिया गया जब पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठने लगे और मामला “Surat news” की सुर्खियों में आ गया।
समाज का मानना है कि क्राइम ब्रांच के पास अधिक संसाधन, अनुभव और तकनीकी क्षमता होती है, जिससे इस संवेदनशील मामले में तेजी से प्रगति हो सकती है।
समाज की मांग: बेटी को सुरक्षित परिवार को सौंपा जाए
पाटीदार समाज की सबसे बड़ी मांग यही है कि नाबालिग बेटी को जल्द से जल्द सुरक्षित ढूंढकर उसके परिवार को सौंपा जाए। समाज का कहना है कि यह केवल एक परिवार की बेटी का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज की अस्मिता और सुरक्षा का सवाल है।
नेताओं ने कहा कि अगर 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ ऐसा हो सकता है और 35 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
समाज ने यह भी मांग की है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग स्रोतों से आरोपी की लोकेशन संबंधी जानकारी पुलिस को दी थी, लेकिन उस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
अगर शुरुआत में ही पुलिस सक्रिय होती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती – ऐसा समाज का कहना है।
नाबालिग लड़कियों को फंसाने का बढ़ता चलन
इस मामले ने समाज में एक बड़े सामाजिक मुद्दे को उजागर किया है। समाज के नेताओं का कहना है कि आजकल कई असामाजिक तत्व नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाते हैं और 18 साल की उम्र पूरी होने तक उन्हें छिपाकर रखते हैं।
ऐसे मामलों में लड़कियां अक्सर यह नहीं देखतीं कि सामने वाला व्यक्ति कौन है, उसका सामाजिक और पारिवारिक बैकग्राउंड क्या है, उसकी जीवनशैली कैसी है। नतीजा यह होता है कि उनका भविष्य अंधकार में चला जाता है।
पुलिस पर लापरवाही के आरोप
समाज के अनुसार, आरोपी का मोबाइल फोन घटना के बाद पांच दिनों तक चालू था और उसकी लोकेशन भी मिल रही थी। इसके बावजूद पुलिस ने ठोस कदम नहीं उठाया।
यही वजह है कि आज 35 दिन बीत जाने के बाद भी लड़की का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
यह मामला अब “Surat news” में पुलिस की जवाबदेही और कार्यशैली पर बहस का केंद्र बन चुका है।
आर्थिक सहायता और सामाजिक एकजुटता
लड़की का परिवार सौराष्ट्र के एक गांव में रहता है और आर्थिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है। पाटीदार समाज ने परिवार को आर्थिक सहायता देने की जिम्मेदारी भी ली है।
बैठक में यह भी अपील की गई कि समाज के लोग एकजुट होकर ऐसे सामाजिक विकारों को खत्म करने के लिए काम करें और युवाओं को जागरूक करें।
PI का बयान: “आरोपी बहुत चालाक है”
जब बड़ी संख्या में लोग सरथाणा पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो PI बी. बी. करपड़ा मौके पर पहुंचे। उन्हें भी लोगों के सवालों का सामना करना पड़ा।
PI का कहना था कि उनकी टीम लगातार आरोपी की तलाश कर रही है, लेकिन आरोपी बेहद चालाक है और पुलिस को चकमा दे रहा है।
हालांकि, यह बयान समाज को संतुष्ट नहीं कर सका। लोगों का कहना था कि चालाक अपराधियों को पकड़ना ही पुलिस की जिम्मेदारी है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
35 दिन बीत जाने के बाद भी नाबालिग लड़की का कोई पता न लगना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
चर्चा है कि सूरत पुलिस कमिशनर ने सरथाणा पुलिस स्टेशन के PI को इस लापरवाही के लिए फटकार भी लगाई है।
यह पूरा घटनाक्रम “Surat news” में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग मामले में जल्द न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।
निष्कर्ष
सूरत में पाटीदार समाज की नाबालिग बेटी के अपहरण का यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, पुलिस जवाबदेही और कानून-व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है।
क्राइम ब्रांच को मामला सौंपे जाने के बाद अब उम्मीद है कि जांच में तेजी आएगी और बेटी को सुरक्षित वापस लाया जाएगा।
समाज की नजरें अब प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में पुलिस क्या ठोस कदम उठाती है और क्या इस मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है।
“Surat news”Saurashtra Express से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि नाबालिगों की सुरक्षा और अपराधों पर त्वरित कार्रवाई आज की सबसे बड़ी जरूरत है।













