तेलंगाना सरकार और रिलायंस फाउंडेशन के महत्वाकांक्षी वाइल्डलाइफ़ संरक्षण कार्यक्रम Vantara के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी की घोषणा की गई है। इस सहयोग के तहत राज्य में एक अत्याधुनिक वाइल्डलाइफ़ कंज़रवेटरी और विश्वस्तरीय नाइट सफारी विकसित की जाएगी।
यह घोषणा सोमवार, 8 दिसंबर को हैदराबाद के पास स्थित भारत फ्यूचर सिटी में आयोजित Telangana Global Rising Summit के दौरान की गई।
राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह प्रोजेक्ट एक “फ्लैगशिप संरक्षण और अनुभवात्मक पर्यटन मॉडल” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में वन्यजीव पुनर्वास और संरक्षण के मानकों को उच्च स्तर पर ले जाना है। इसके साथ ही यह आगंतुकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव भी उपलब्ध कराएगा।
कंज़रवेटरी और नाइट सफारी में क्या होगा खास?
सरकार के बयान में कहा गया कि यह प्रस्तावित कंज़रवेटरी वैज्ञानिक वन्यजीव देखभाल, अनुसंधान, प्राकृतिक आवासों के पुनर्निर्माण और जनजागरूकता को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाएगी।
परियोजना में immersive exhibits, शोध-आधारित संरक्षण मॉडल, और विज़िटर्स के लिए गाइडेड नाइट सफारी शामिल होगी, जहां लोग जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक परिवेश में रात के समय देखने का विशेष अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
पूरे प्रोजेक्ट का संचालन और तकनीकी दिशा-निर्देशन Vantara के विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जाएगा, जो वन्यजीव बचाव और पुनर्वास में पहले से ही उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
सीएम रेवंत रेड्डी का बयान: “संरक्षण हमारी प्राथमिकता है, व्यावसायिकता नहीं”
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि राज्य का उद्देश्य ऐसे पर्यटन संसाधन तैयार करना है जो संरक्षण को व्यावसायिक लाभ से ऊपर रखें।
उन्होंने कहा कि Vantara की यह पहल राज्य की उस व्यापक दृष्टि से मेल खाती है, जिसके तहत तेलंगाना को “इकोलॉजिकल रूप से संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक पर्यटन हब” बनाया जाना है।
सीएम ने यह भी कहा कि यह प्रोजेक्ट स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा और साथ ही जैव विविधता की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Jamnagar का Vantara: दुनिया के सबसे बड़े निजी वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू सेंटरों में शामिल
रिलायंस फाउंडेशन द्वारा गुजरात के जामनगर में विकसित Vantara Zoological Rescue and Rehabilitation Centre को दुनिया के सबसे बड़े निजी वन्यजीव बचाव केंद्रों में से एक माना जाता है।
यहां बचाए गए हाथियों के लिए विशेष आवास, उन्नत पशु चिकित्सा सुविधाएं, पुनर्वास केंद्र, और वैश्विक स्तर के संरक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक वन्यजीव संगठनों और कार्यकर्ताओं ने Vantara द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों से लाए गए जानवरों को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
मुख्य चिंता यह रही कि बड़ी संख्या में जानवर भारत कैसे भेजे गए और क्या इनके दस्तावेज़ व अनुमतियाँ पूरी तरह पारदर्शी थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया क्लीन चिट
सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए Vantara को क्लीन चिट दी।
SIT ने अपनी जांच में कहा कि वन्यजीवों की खरीद-फरोख्त में कोई अनियमितता या गैरकानूनी गतिविधि नहीं पाई गई।
Vantara ने हमेशा यह दावा किया है कि वह केवल बचाए गए, घायल, और कमजोर जानवरों को ही अपने संरक्षण केंद्र में लाता है और इन्हें बेहतर जीवन देने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करता है।
CITES रिपोर्ट में उठी कुछ आपत्तियाँ
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट के बाद भी अंतरराष्ट्रीय संस्था CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने कुछ मामलों में पर्याप्त जांच नहीं की, जिससे कुछ प्रजातियों के आयात में CITES की कुछ प्रक्रियाएँ प्रभावित हुईं।
रिपोर्ट ने भारत से प्रक्रियात्मक पारदर्शिता को और मजबूत करने की सिफारिश की है।
तेलंगाना में नया Vantara प्रोजेक्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
तेलंगाना में यह प्रोजेक्ट कई मायनों में बेहद अहम है:
- यह राज्य में विश्वस्तरीय वाइल्डलाइफ़ संरक्षण मॉडल स्थापित करेगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती मिलेगी।
- राज्य को इको-टूरिज़्म का नया बड़ा केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
- संरक्षण-केंद्रित पर्यटन का नया उदाहरण बनकर अन्य राज्यों के लिए एक सफल मॉडल बन सकता है।
इसके साथ ही Vantara की विशेषज्ञ टीम राज्य के वन विभाग के साथ मिलकर पुनर्वास, पशु चिकित्सा अनुसंधान, और आवास पुनर्निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी तकनीकी सहायता प्रदान करेगी।













