soldier Kishan Singh Gohil martyred

Bhavnagar soldier Kishan Singh Gohil martyred: महुवा के वीर बेटे को अंतिम विदाई, गांव में शोक का माहौल

भवनगर जिले के महुवा तालुका का पूरा इलाका उस समय गम में डूब गया जब यह खबर सामने आई कि Bhavnagar soldier Kishan Singh Gohil martyred while performing his duty. भारतीय सेना में सेवा दे रहे किशनसिंह शिवुभा गोहिल का 4 दिसंबर 2025 को कलकत्ता हेडक्वार्टर में ड्यूटी के दौरान एक हादसे में दुखद निधन हो गया। इस घटना ने परिवार, गांव और पूरे पंथक को शोक से भर दिया है।

12 वर्षों से कर रहे थे सेना में सेवा

किशन सिंह गोहिल पिछले 12 वर्षों से आर्मी सप्लाई कोर में तैनात थे। अपने शांत, अनुशासित और जिम्मेदार स्वभाव के कारण वे हमेशा अपनी यूनिट और वरिष्ठ अधिकारियों में सम्मानित थे। देश की सेवा उनका पहला कर्तव्य था और इसी कर्तव्य को निभाते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी।

उनके निधन की खबर मिलते ही पूरा महुवा पंથक स्तब्ध रह गया। लोग इस युवा और समर्पित सैनिक की बहादुरी को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

रात में वतन लाया गया पार्थिव शरीर

शहीद जawan का पार्थिव शरीर देर रात उनके वतन महुवा पहुंचाया गया। जैसे ही शव गांव लाया गया, सैकड़ों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। स्थानीय नागरिक, रिश्तेदार, गांव के बुजुर्ग, सामाजिक संगठन, राजनीतिक नेता और प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

मामलतदार, बगदाना पुलिस स्टाफ और कई जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर इस वीर सुपुत्र को भावभीनी विदाई दी।

यह भी पढ़े: Suryakiran air show rajkot timings: राजकोट में होने वाला रोमांचक एयर शो, शहर तैयार भव्य नज़ारे का गवाह बनने के लिए

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

Bhavnagar soldier Kishan Singh Gohil martyred के सम्मान में उनका अंतिम संस्कार महुवा के छोटे खुटवड़ा गांव के स्मशान स्थल पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। पूरे सम्मान के साथ सेना के जवानों और स्थानीय प्रशासन ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कराईं। अंतिम यात्रा में भारत माता के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

गांव में पसरा सन्नाटा, परिवार पर टूटा दुख का पहाड़

किशन सिंह के परिवार का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। माता-पिता, पत्नी और अन्य परिजनों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोगों का कहना है कि किशनसिंह हमेशा अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित और स्वभाव से विनम्र थे। उनका जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।

Scroll to Top